Sunday, May 3, 2026
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विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2026: भारत 157वें स्थान पर खिसका, वैश्विक स्तर पर गहराया संकट

असल न्यूज़: विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2026 में भारत की स्थिति फिर कमजोर हुई है। Reporters Without Borders द्वारा जारी ताज़ा रिपोर्ट में भारत 180 देशों में 157वें स्थान पर पहुंच गया है।


📊 रैंकिंग में गिरावट

  • 2026: 157वां स्थान
  • 2025: 151वां स्थान
  • 2024: 159वां स्थान

👉 यानी भारत इस साल 6 स्थान नीचे खिसक गया है


🌍 वैश्विक तस्वीर चिंताजनक

हर साल 3 मई को मनाए जाने वाले World Press Freedom Day से पहले जारी यह रिपोर्ट बताती है कि:

  • आधे से ज्यादा देश “कठिन” या “अत्यंत गंभीर” श्रेणी में हैं
  • पिछले 25 वर्षों में वैश्विक औसत स्कोर सबसे कम स्तर पर पहुंच गया है

📉 भारत से नीचे और ऊपर कौन?

भारत से नीचे रैंकिंग वाले देश:

  • वेनेजुएला
  • सूडान
  • इराक
  • तुर्की
  • अफगानिस्तान
  • ईरान
  • चीन
  • उत्तर कोरिया

👉 वहीं पाकिस्तान (153), फिलिस्तीन (156), भूटान (150) और सीरिया (141) जैसे देशों ने अपनी स्थिति में सुधार किया है।


⚠️ गिरावट के प्रमुख कारण

रिपोर्ट के अनुसार प्रेस स्वतंत्रता का आकलन 5 संकेतकों पर किया जाता है:

  • आर्थिक
  • कानूनी
  • राजनीतिक
  • सामाजिक
  • सुरक्षा

👉 इनमें कानूनी संकेतक में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है।

📌 रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:

  • पत्रकारिता का अपराधीकरण बढ़ रहा है
  • राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों का अधिक उपयोग
  • जमीनी पत्रकारों को निशाना बनाए जाने के मामले
  • न्यायिक उत्पीड़न और दबाव

🇺🇸 अमेरिका में भी गिरावट

अमेरिका भी इस साल 7 स्थान गिरकर 64वें स्थान पर पहुंच गया है।
रिपोर्ट के अनुसार:

  • पत्रकार आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं
  • जनता का भरोसा कम हुआ है
  • मीडिया पर राजनीतिक दबाव बढ़ा है

🌎 टॉप और बॉटम देश

  • 🥇 नॉर्वे लगातार 10वें साल शीर्ष पर
  • इसके बाद: नीदरलैंड, एस्टोनिया, डेनमार्क, स्वीडन
  • ❌ सबसे नीचे: इरिट्रिया

👉 सीरिया ने सबसे बड़ा सुधार करते हुए 36 स्थान की छलांग लगाई।


🔥 वैश्विक संकट गहराया

रिपोर्ट के अनुसार:

  • युद्ध और संघर्ष वाले क्षेत्रों में पत्रकारों की स्थिति बेहद खराब
  • गाजा में 220 से अधिक पत्रकारों की मौत
  • पूर्वी यूरोप और पश्चिम एशिया सबसे खतरनाक क्षेत्र

👉 चीन, उत्तर कोरिया और इरिट्रिया जैसे देशों में सख्त सरकारी नियंत्रण प्रमुख कारण बताए गए हैं।


निष्कर्ष

रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि
👉 दुनिया भर में प्रेस की स्वतंत्रता लगातार कमजोर हो रही है

पत्रकारों पर बढ़ते दबाव, कानूनों का दुरुपयोग और आर्थिक चुनौतियां इस संकट को और गहरा बना रही हैं।

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