असल न्यूज़: महाराष्ट्र के पुणे में चल रहे आपराधिक मानहानि मामले की सुनवाई के दौरान विनायक दामोदर सावरकर को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। उनके रिश्तेदार सत्यकी सावरकर ने अदालत में स्वीकार किया कि सावरकर ने ब्रिटिश शासन के दौरान पांच बार दया याचिकाएं दाखिल की थीं।
यह मामला राहुल गांधी के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि शिकायत से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि उन्होंने लंदन में दिए गए एक भाषण में सावरकर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।
दया याचिकाओं पर क्या कहा?
कानूनी रिपोर्ट्स के अनुसार, जिरह के दौरान सत्यकी सावरकर ने माना कि सावरकर ने सेल्युलर जेल में रहते हुए पांच बार दया याचिकाएं दी थीं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उस समय कई अन्य राजनीतिक बंदियों ने भी ऐसा किया था।
🐄 गाय पर सावरकर के विचार
अदालत में पूछे गए सवाल पर सत्यकी सावरकर ने कहा कि सावरकर गाय को भगवान नहीं मानते थे, बल्कि एक उपयोगी पशु के रूप में देखते थे।
⚔️ दो-राष्ट्र सिद्धांत पर बयान
सत्यकी सावरकर ने कहा कि कुछ इतिहासकार सावरकर पर दो-राष्ट्र सिद्धांत का आरोप लगाते हैं, लेकिन उनके अनुसार यह विचार मूल रूप से सावरकर का नहीं था। उन्होंने दावा किया कि इसकी अवधारणा सबसे पहले सर सैयद अहमद खान ने रखी थी।
🪖 ब्रिटिश सेना में भर्ती की अपील
सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी उठा कि सावरकर ने द्वितीय विश्व युद्ध के समय भारतीयों से ब्रिटिश सेना में भर्ती होने की अपील की थी।
इस पर सत्यकी सावरकर ने कहा कि इसका उद्देश्य भारतीय युवाओं को सैन्य प्रशिक्षण दिलाना था, ताकि स्वतंत्रता के बाद देश के पास प्रशिक्षित सेना हो।
🤐 भगत सिंह से तुलना पर चुप्पी
जब सावरकर की तुलना भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त से किए जाने पर सवाल पूछा गया, तो सत्यकी सावरकर ने जवाब देने से इनकार कर दिया।
🏛️ RSS और भारत रत्न पर जवाब
आरएसएस और राजनीतिक विचारधारा से जुड़े सवालों पर उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।
साथ ही, सावरकर को भारत रत्न देने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह निर्णय सरकार का अधिकार क्षेत्र है।
📅 अगली सुनवाई
इस मामले की अगली सुनवाई 1 जून को होगी।
⚠️ निष्कर्ष
पुणे कोर्ट में चल रही इस सुनवाई ने सावरकर से जुड़े कई ऐतिहासिक और राजनीतिक पहलुओं को फिर से चर्चा में ला दिया है। आने वाले दिनों में इस मामले पर और बहस तेज होने की संभावना है।

