असल न्यूज़: भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के ऐतिहासिक नारे ‘करो या मरो’ की भावना को जीवंत करते हुए रविवार को जंतर मंतर पर बेसहारा कुत्तों के लिए जोरदार प्रदर्शन किया गया। हाथों में बैनर और तख्तियां लिए प्रदर्शनकारी सरकार से कानूनी और मानवीय नीति अपनाने की मांग करते नजर आए।
बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल हुए लोग
इस प्रदर्शन में पशु अधिकार कार्यकर्ता, डॉक्टर्स, सामाजिक संगठनों के लोग और बड़ी संख्या में पशु प्रेमी शामिल हुए। प्रदर्शन में पशु प्रेमी और सामाजिक कार्यकर्ता अंबिका शुक्ला, गौरी मौलेखी, योगिता भयाना, महा सिंह शर्मा और मानवी राय सहित कई लोग मौजूद रहे। इसके अलावा लोकल फीडर्स, आरडब्ल्यूए प्रतिनिधि और आम लोगों ने भी समर्थन जताया।
कुत्तों को पकड़कर जबरन हटाना कोई उपाय नहीं
कला और संस्कृति जगत से भी प्रदर्शन को समर्थन मिला। प्रसिद्ध गायक मोहित चौहान और राहुल राम ने संगीत के जरिए एकजुटता दिखाई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बेसहारा कुत्तों को बड़े पैमाने पर पकड़कर शेल्टर में बंद करना या जबरन हटाना न तो वैज्ञानिक है और न ही इससे रेबीज जैसी गंभीर बीमारियों पर प्रभावी रोकथाम संभव है। एक्सपर्ट्स ने बताया कि भारत में कानून के तहत पशु बर्थ कंट्रोल और एंटी रेबीज वैक्सीनेशन जरूरी है लेकिन इसे अब तक सही तरीके और जरूरी पैमाने पर लागू नहीं किया गया।
ठोस नीति बनाने पर दिया जोर
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि डर और गलत सूचनाओं के आधार पर फैसले लेने के बजाय ठोस वैज्ञानिक तथ्यो और एक्सपर्ट्स की सलाह से नीति बनाई जाए ताकि जन सुरक्षा के साथ पशु कल्याण भी सुनिश्चित हो सके। दिल्ली के अलावा मुंबई, चेन्नै, बेंगलुरु, कोलकाता, लखनऊ, जयपुर, अहमदाबाद, हैदराबाद, पुणे और त्रिवेंद्रम समेत देश के 50 से ज्यादा शहरों में भी इसी मुद्दे पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुए। जंतर मंतर पर हुए कार्यक्रम में शामिल लोगों ने लोकल फीडर्स और आरडब्ल्यूए के लोगों को वेलफेयर के असली चैंपियन बताया।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें
बेसहारा कुत्तो को बड़े पैमाने पर हटाने और बंद करने वाले मौजूदा निर्देशो पर तुरंत रोक लगाई जाए।
सुप्रीम कोर्ट में ठीक सुनवाई हो, जिसमें डॉक्टर्स, एक्सपर्ट्स, पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट्स और पशु व्यवहार वैज्ञानिक शामिल हो।
कानून के तहत जरूरी एबीसी और एंटी रेबीज टीकाकरण के लिए फंडिंग और निगरानी की जाए।

