असल न्यूज़: साउथ ईस्ट डिस्ट्रिक्ट की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने नवजात बच्चों की खरीद फरोख्त करने वाले एक गिरोह का खुलासा करते हुए एक डॉक्टर सहित दस लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने 6 मासूमों को मुक्त कराया है। इनमें सभी एक साल से छोटे हैं। जिन्हें अलग अलग परिवार को बेच दिया गया था।
आरोपियों से कर रही पूछताछ
पकड़े गए आरोपियों की पहचान मुख्य आरोपी पिनहाट आगरा निवासी वीरभान (30), कालीचरण (45), यह वीरभान का ससुर है और अपहरण में शामिल था, आगरा स्थित के. के हॉस्पिटल के मालिक डॉ. कमलेश कुमार (33), फिरोजाबाद निवासी निखिल कुमार (22), आगरा निवासी प्रीति शर्मा (30), लखनऊ निवासी ज्योत्सना (39), सुंदर सिंह (35), रितु त्रिपाठी (40), आगरा निवासी कृष्णा शर्मा (28) और आगरा निवासी रचिता अग्रवाल (42) के रूप में हुई है। पुलिस फिलहाल गिरोह के बाकी सदस्यों को गिरफ्तार करने के लिए आरोपियों से पूछताछ कर रही है।
एसआईटी ने 48 घंटे में किया बरामद
डीसीपी के अनुसार, बच्चे से जुड़ा मामला होने के चलते मामले की जांच के लिए अडिशनल डीसीपी ऐश्वर्या शर्मा, की देखरेख में एसआईटी बनाई गई। एसआईटी ने आईएसबीटी पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को चेक किया और बच्चे के साथ दिखाई दे रहे एक आरोपी वीरभान की पहचान कर उसे उत्तर प्रदेश के फतेहाबाद स्थित उसके पैतृक गांव पिनाहट से गिरफ्तार किया। आरोपी से पूछताछ के बाद बाकी आरोपी पकड़े गए और उनके पास से बच्चे बरामद किए गए। एसआईटी ने सुरेश के बच्चे को 48 घंटे में मुक्त करा लिया।
केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी
डीसीपी डॉ. हेमंत तिवारी ने बताया कि सुरेश परिवार के साथ बांदा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और ईंट बनाने का काम करते हैं। पुलिस को सुरेश ने 22 अगस्त को शिकायत दी कि वह अपनी पत्नी और चार बच्चों के साथ उत्तर प्रदेश से बेहरोर जा रहे थे। वह आईएसबीटी सराय काले खां रुके और बस का इंतजार करने लगे। इंतजार के दौरान परिवार प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर सो गया। रात करीब 11 बजे उन्हें पता चला कि उनका सबसे छोटा बेटा (छह महीने) का गायब है। पीड़ित ने बच्चे को इधर-उधर तलाशा, नहीं मिलने पर मामले की सूचना पुलिस को दी गई। सनलाइट कॉलोनी थाना पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
700 नंबरों को शॉर्टलिस्ट किया
स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम के इंस्पेक्टर राजेन्द्र डागर की टीम ने शिकायतकर्ता के बयान के बाद बस अड्डे के आसपास लगे CCTV फुटेज खंगाले तो पुलिस को दो व्यक्ति सुरेश के पास आते दिखाई दिए। दोनों ने बच्चों को उठाया और निकल गए। घटना के समय AWE एक्टिव 700 से ज्यादा नंबरों को शॉर्टलिस्ट कर 50 संदिग्ध नंबरों की जांच की गई। वीरभान की पहचान कर उसे फतेहाबाद में उसके घर से पकड़ा। उसने बताया कि रामबाबू ने उसे बच्च्चा चुराने के लिए कहा था। अपने ससुर कालीचरण के साथ मिलकर उसने बस अड्डे से बच्चे को चुराया। आरोपियों ने आगरा में के.के. अस्पताल के मालिक डॉ. कमलेश कुमार को बच्चा सौंपा और मिले डेढ़ लाख रुपये रामबाबू, वीरभान और उसके ससुर ने बांट ली। फरार रामवरण की तलाश की जा रही है। रडार पर यूपी के तीन नर्सिंग होम भी है।
पुलिस ने बच्चे को बरामद कर लिया
डीसीपी डॉ. हेमंत तिवारी के अनुसार, साक्ष्य मिलने के बाद इंस्पेक्टर राजेन्द्र डागर आगरा स्थित के. के अस्पताल में मरीज बनकर पहुंचे। डॉक्टर के फरार होने के शक के चलते रात में इंस्पेक्टर ने हार्ट की परेशानी बताकर डॉ. कमलेश कुमार से इलाज करवाने की बात कही। उनके साथ एसआई शुभम और एसआई मुनेश थे। डॉक्टर के आते ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। फिर चार घंटे बाद ही पुलिस ने बच्चे को बरामद कर लिया और यूपी के विभिन्न शहरों और उत्तराखंड में बेचे गए 5 अन्य मासूम बच्चों को मुक्त कराया। पुलिस आगरा के केके अस्पताल पहुंची और डॉ. कमलेश को गिरफ्तार किया। फरार एमआर सुंदर को 50 किलोमीटर तक पीछा कर राजस्थान बॉर्डर से दबोचा। सुंदर आगरा की सगी बहनें कृष्णा और प्रीति शर्मा को बच्चा बेचता था। दोनों बहनें बिचौलिए रितु के जरिए खरीदारों तक बच्चा पहुंचाती थीं। पुलिस ने सराय काले खां से चोरी बच्चा दोनों बहनों के घर से बरामद कर इन्हें गिरफ्ता कर लिया।

