असल न्यूज़: दिल्ली में हार्ट अटैक और इससे जुड़ी दिल की बीमारियों से मौतों का आंकड़ा लगातार चिंता बढ़ा रहा है। साल 2005 से 2024 के बीच राजधानी में कुल 3,29,857 लोगों की मौत हार्ट अटैक (दिल के दौरे) और हार्ट की बीमारियों की वजह से हुई। वहीं, दूसरी और दिल्ली में निमोनिया की वजह से भी मौत की संख्या में इजाफा दर्ज हो रहा है।
निमोनिया की वजह से 2021 में सबसे अधिक मौतें हुई थी, अब 2024 में 5 हजार से अधिक मौत की वजह निमोनिया पाया गया है। यह खुलासा दिल्ली सरकार के डायरेक्टोरेट ऑफ इकोनॉमिक्स एंड स्टेटिस्टिक्स 2024 की रिपोर्ट में किया गया है।
मौतों में से 2,69,703 यानी 81.76% मौतें अस्पतालों में हुई, जो बताता है कि ज्यादातर मरीज गंभीर हालत में संस्थागत इलाज तक पहुंच रहे है। बीते 20 साल में 2024 सबसे घातक साल रहा, जब 34,539 मौतें दर्ज की गई, जे पिछले 20 सालों में सबसे ज्यादा है। 2010 में सबसे कम 8. 236 मौतें हुई।
2024 में दिल की बीमारियों से 21,262 लोगों की मौत
दिल की बीमारियों से हुई कुल मौतों में संस्थागत (अस्पतालों में) मौतों की संख्या 61.56% से 99.75% के बीच रही। 2024 में अस्पतालों में 21,262 मौतें दर्ज की गई, जबकि 2005 में यह संख्या 6,448 थे
बुजुर्ग और बच्चों के लिए जानलेवा है निमोनिया
2005 से 2024 के बीच राजधानी में निमोनिया से मौतों और अस्पतालों में दर्ज मौतों का विश्लेषण बताता है कि यह बीमारी बच्चों और बुजुर्गों के लिए सबसे बड़ा खतरा बनी हुई है। 2021 में निमोनिया से 6,751 मैले हुई। 2006 में सबसे कम 868 मौते रिपोर्ट हुई। कूल मौतों में से 69.10% से 99.90% तक मौतें अस्पतालों में हुई, यानी अधिकतर मरीज गंभीर हालत में अस्पतालों में इलाज तक पहुंचे। निमोनिया की वजह से सबसे ज्यादा मौतें बच्चों की ही हुई, जबकि 65 साल से ऊपर 11,393 मौतें हुई।

