असल न्यूज़: देश की राजधानी की चमक-दमक पीछे एक ऐसी स्याह सच्चाई छिपी है, जो दिल कचोट देने वाली है। हर दिन किसी ना किसी घर से कोई गायब हो जाता है। किसी के माता-पिता लापता होते हैं तो किसी का बेटा या बेटी। कई नाबालिग भी बिछुड़ जाते हैं, जिनकी मां की आंखें इंतजार में पथरा जाती हैं। कई के हिस्से में खुशी आती है, क्योंकि उनका करीबी ढूंढ लिया जाता है। कुछ परिवार ऐसे भी होते हैं, जिनका इंतजार खत्म ही नहीं होता है….. उनका ‘प्रिय’ तमाम कोशिशों के बावजूद मिल नहीं पाता है। दिल्ली में पिछले 11 साल के दौरान लापता हुए बुजुर्गों से लेकर बच्चे-बच्चियों तक की कहानी का पहला पार्ट पढ़िए इस स्पेशल रिपोर्ट में।
टूटे सपने, अधूरी कहानियां और इंतजार
हर साल औसतन 23,221 लोग लापता हो रहे हैं। करीब 18,314 या घर लौट आते हैं या उन्हें ढूंढ लिया जाता है। लेकिन करीब 4907 के परिवारों के हिस्से में आता है सिर्फ इंतजार..! ये सिर्फ आंकड़े नहीं है, बल्कि हजारों परिवारों के टूटे सपने, उनकी अधूरी कहानियां और अपनों से मिलने के इंतजार की कहानी हैं।
बालिग ज्यादा हुए हैं गायब
चौंकाने वाली बात ये है कि लापता होने वालों बालिगों की तादाद ज्यादा है। बीते 11 साल में 18 साल से बड़ी उम्र के 187191 गायब हुए, जिनमें 87551 पुरुष और 99668 महिलाएं थीं। इनमें से कुल 140251 मिल गए, जिनमें 65700 पुरुष और 74555 महिलाएं मिल गए। अभी 46948 अपने घर नहीं लौट सके हैं, जिनमें 25093 महिलाएं हैं। सबसे गुम होने वाले 19047 साल 2024 में रहे, जिनमें 10555 महिलाएं थीं। अनट्रेस का आंकड़ा भी सर्वाधिक 2024 का ही रहा जो 8283 है। सबसे ज्यादा 13728 को 2015 में खोजा गया था।
2024 में सबसे ज्यादा गायब हुए
2015 से 2025 तक पुरुषों की तुलना में महिलाओं के लापता होने की तादाद ज्यादा रही है। इन 11 साल में 1,44,286 महिलाएं तो 1,11,146 पुरुष गुम हुए। इनमें से 1,14,181 महिलाओं और 87,274 पुरुषों को ढूंढ लिया गया। इसके बावजूद 30,105 महिलाएं और 37297 पुरुष अब भी गायब है। सबसे ज्यादा 2024 में 24,893 लोग गुम हुए, जिनमें 14,752 महिलाएं थी और यह 11 साल का रेकॉर्ड है। सबसे ज्यादा 9633 लोग 2024 में ट्रेस नहीं हो सके। ढूंढने का बेहतरीन रेकॉर्ड 2015 का है, जो 2108 लोगों का रहा।
लड़कियां ज्यादा हुईं लापता
पिछले 11 साल में 18 साल से कम उम्र के 68233 लड़के-लड़कियां गायब हुए। इनमें 44638 लड़कियां थी। जबकि लड़के 23595 थे। सर्वाधिक लड़किया 2023 में 4367 गुम हुईं। ज्यादा लड़के-लड़किया 2015 में 7928 लापता हुए थे तो खोजे भी सर्वाधिक 7330 इसी साल गए। आंकड़ों पर गौर करें तो ट्रेस नहीं होने के डेटा 2024 और 2025 के निराशाजनक रहे। साल 2024 में 1305 तो 2025 में सबसे ज्यादा 1505 बच्चे नहीं ढूंढे जा सके। बीते 11 साल में कुल 61198 तलाश कर लिए गए, जबकि 7035 आज तक नही मिल सके हैं।
कोरोना महामारी के समय आई गिरावट
कोरोना के दौरान 2020 में लापता लोगों की संख्या सबसे कम 17,944 दर्ज हुई। 14,655 मिल गए। 3,289 नही मिले। इसके बाद फिर से गायब होने का ग्राफ फिर तेजी से चढ़ने लगा। इन 11 सालों पर नजर डालें तो हर साल पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के गुम की तादाद ज्यादा रही है, जो पिछले तीन साल के दौरान 14 हजार से ज्यादा दर्ज हो रहे हैं। पिछले तीन साल में ट्रेस होने के आंकड़ों में पहले की तुलना में गिरावट आई है, जो पुलिस के लिए एक चुनौती है।

