Wednesday, January 28, 2026
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जागृति अपार्टमेंट के लोग तिल-तिल कर जीवन जीने को मजबूर.

नई दिल्ली (चंद्र प्रकाश शर्मा): जागृति अपार्टमेंट, सैनिक विहार, पीतमपुरा, दिल्ली निवासी 84 वर्षीय श्री नरेंद्र पाल सिंह (अधिवक्ता) जागृति अपार्टमेंट से सटे लोक निर्माण विभाग (PWD) के प्लॉट से कूड़ा-कचरा, गाद और मलबा हटवाने के लिए मुख्यमंत्री एवं पीडब्ल्यूडी मंत्री श्री प्रवेश कौशिक तथा संबंधित अधिकारियों को दर्जनों पत्र लिख चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान होने के बजाय आज भी यहां प्रतिदिन ट्रकों द्वारा मलबा डाला जा रहा है। परिणामस्वरूप क्षेत्रवासियों का दुर्गंध में जीना मुहाल हो गया है। गंदगी से मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है और बीमारियों की आशंका भी लगातार बढ़ती जा रही है। लोग अपनी बालकनियों में बैठकर धूप का आनंद लेने से भी वंचित हो रहे हैं।

निवासियों को उम्मीद थी कि सरकार बदलने के बाद तत्काल कार्रवाई होगी, लेकिन स्थिति आज भी “ढाक के तीन पात” बनी हुई है।

श्री नरेंद्र पाल सिंह ने बताया कि उनकी सोसाइटी से सटा हुआ एक पीडब्ल्यूडी का प्लॉट है, जिसे क्षेत्र के पूर्व विधायक श्री सत्येंद्र जैन जी एक सुंदर पार्क के रूप में विकसित करना चाहते थे। विकास कार्य शुरू भी हो गया था और खंभे भी लगाए गए थे, लेकिन श्री जैन के जेल जाने के बाद निर्माण कार्य रुक गया। उन्होंने बताया कि इसके बाद किसी ने इस परियोजना में रुचि नहीं ली, जबकि इसके लिए धन पहले ही स्वीकृत हो चुका था। इसके बाद इस प्लॉट पर कूड़ा-कचरा, गाद और मलबा डाला जाने लगा।

स्थानीय लोगों ने कई बार विरोध भी किया, लेकिन अधिकारियों ने एक न सुनी। सरकार बदलने के बाद फिर से उम्मीद जगी कि समस्या का स्थायी समाधान निकलेगा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। कई बार अधिकारियों से मिलने के बावजूद उनके कानों पर जूं तक नहीं रेंगी और लोक निर्माण विभाग की गाड़ियां लगातार यहां कचरा डालती रहीं।

श्री सिंह का कहना है कि मुख्यमंत्री और अन्य मंत्री पत्रों या ई-मेल का उत्तर देना भी उचित नहीं समझते। लोगों की शिकायतों का समाधान हो रहा है या नहीं, इसकी कोई प्रभावी निगरानी व्यवस्था नहीं है। पत्र संबंधित विभाग को अग्रेषित कर दिए जाते हैं, उसके बाद क्या कार्रवाई हुई, इसकी कोई जानकारी नहीं मिलती। चार चार इंजन वाली सरकार होने के बावजूद अगर काम नहीं होता तो ये एक अत्यंत दुखद विषय है।

उन्होंने मांग की है कि इस मामले में अविलंब कार्रवाई कर स्थानीय सोसाइटी के लोगों को राहत पहुंचाई जाए।

 

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