पवित्र महीने रमजान के दौरान राजधानी नई दिल्ली में खाने-पीने की चीजों के दाम तेजी से बढ़ गए हैं। इफ्तार और सहरी में इस्तेमाल होने वाले फूड आइटम्स की कीमतों में 30 से 50 प्रतिशत तक इजाफा देखा जा रहा है। इसकी मुख्य वजह गैस सिलेंडरों की कमी और बढ़ती कीमतें बताई जा रही हैं।
जानकारी के अनुसार, जामा मस्जिद इलाके में गुरुवार रात और शुक्रवार सुबह कारोबारियों के बीच बैठकों का दौर चला। इन बैठकों में तय किया गया कि गैस की भारी किल्लत और महंगे सिलेंडरों के कारण दुकानदारों को अपने फूड आइटम्स की कीमतें बढ़ानी पड़ेंगी।
आम लोगों के बजट पर असर
कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है। रोटी से लेकर बिरयानी तक कई चीजें डेढ़ से दो गुना महंगी हो चुकी हैं। कुछ जगहों पर चाय के दाम भी 15 रुपये से बढ़ाकर 30 रुपये तक कर दिए गए हैं।
लकड़ी और कोयले के चूल्हों का सहारा
पिछले कुछ वर्षों में प्रदूषण नियंत्रण के चलते होटलों और ढाबों में कोयले और लकड़ी के चूल्हों का इस्तेमाल लगभग बंद हो गया था। लेकिन गैस की किल्लत के चलते अब कई कारोबारी फिर से लकड़ी और कोयले के चूल्हों का सहारा लेने को मजबूर हो गए हैं।
30 से 50 प्रतिशत तक बढ़े दाम
मार्केट के पुराने कारोबारी फजलुर्रहमान के मुताबिक मीटिंग के बाद यह फैसला लिया गया कि रोटी, बिरयानी, निहारी, कोरमा, कबाब, शीरमाल और दही बड़े जैसे मुगलई फूड आइटम्स के दाम 30 से 50 प्रतिशत तक बढ़ाए जाएंगे। पहले 7 रुपये में मिलने वाली रोटी अब 10 रुपये में मिलेगी।
कई होटल बंद होने की कगार पर
ओखला इलाके के मार्केट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष खतीब तिहामी का कहना है कि गैस की भारी कमी के कारण कई होटल बंद हो चुके हैं, जबकि कई बंद होने की कगार पर हैं। उन्होंने बताया कि रमजान के दौरान कारोबारियों के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण होता है, लेकिन गैस संकट ने कारोबार पर बड़ा असर डाला है।
उन्होंने बताया कि इस समस्या को लेकर जल्द ही स्थानीय प्रशासन और एसडीएम को ज्ञापन सौंपा जाएगा।

