असल न्यूज़: देश के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में शामिल गंगा एक्सप्रेसवे अब टोल दरों और लागत को लेकर बहस के केंद्र में है। 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को पूर्वी हिस्से से जोड़ने वाला बड़ा प्रोजेक्ट माना जा रहा है।
मुख्य तथ्य (Project Highlights)
- कुल लागत: लगभग ₹36,230 करोड़ (निर्माण + भूमि अधिग्रहण)
- लंबाई: 594 किलोमीटर
- मार्ग: मेरठ से प्रयागराज
- उद्घाटन: 29 अप्रैल 2026 को नरेंद्र मोदी द्वारा
- विशेषता: 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे (भविष्य में 8-लेन तक विस्तार संभव)
- निर्माण: Adani Group और IRB Infrastructure जैसी कंपनियों द्वारा
💰 संभावित टोल दरें (आना-जाना)
- दोपहिया वाहन: ₹905
- तीनपहिया वाहन: ₹905
- कार: ₹3,600
- हल्के वाणिज्यिक वाहन (LCV): ₹5,600
- ट्रक/बस: ₹11,400
👉 इन टोल दरों को लेकर बड़ा सवाल उठ रहा है —
क्या आम भारतीय इस एक्सप्रेसवे का उपयोग करने का खर्च उठा पाएगा?
📊 निवेश और फंडिंग पर उठे सवाल
परियोजना की कुल लागत ₹36,230 करोड़ बताई जा रही है, जबकि पहले करीब ₹9,000 करोड़ के निजी निवेश की भी चर्चा रही है।
अब मांग उठ रही है कि:
- उत्तर प्रदेश सरकार
इस पूरे प्रोजेक्ट पर श्वेत पत्र (White Paper) जारी करे - यह स्पष्ट किया जाए कि
- निजी कंपनियों ने कितना निवेश किया
- सरकार का वास्तविक खर्च कितना है
- टोल तय करने का आधार क्या है
आम जनता पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार:
- ऊंचे टोल से मध्यम वर्ग पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा
- ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से महंगाई पर असर पड़ सकता है
- छोटे व्यापारी और रोजाना यात्रा करने वाले लोग सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे
बड़ा सवाल
गंगा एक्सप्रेसवे को विकास की बड़ी उपलब्धि बताया जा रहा है, लेकिन
क्या यह एक्सप्रेसवे आम जनता के लिए सुलभ रहेगा या केवल चुनिंदा लोगों तक सीमित हो जाएगा?

