असल न्यूज़। उत्तर-पूर्वी दिल्ली की साइबर पुलिस ने क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने के नाम पर लोगों से गोपनीय कार्ड डिटेल हासिल कर साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में पांच आरोपियों करण उर्फ काके, राकेश कुमार उर्फ राणा, फैजान, गौरव शर्मा और रौनक को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपी दिल्ली के रहने वाले हैं।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने एक पीड़ित को बैंक प्रतिनिधि बनकर फोन किया और उसके क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का झांसा दिया। आरोपी ने पीड़ित को एक फर्जी बैंक वेबसाइट पर जाने के लिए कहा। वेबसाइट असली बैंक की वेबसाइट जैसी दिखाई देती थी। पीड़ित ने उस पर अपने क्रेडिट कार्ड की गोपनीय जानकारी दर्ज कर दी।
इसके बाद आरोपियों ने क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर करीब 31,663 रुपये की अनधिकृत खरीदारी की। इस मामले में साइबर थाना, उत्तर-पूर्वी जिला में ई-एफआईआर नंबर 24/2026, दिनांक 9 सितंबर 2026 के तहत BNS की धारा 318(4)/319(2) में मामला दर्ज किया गया।
फर्जी वेबसाइट बनाकर करते थे ठगी
जांच के दौरान पुलिस ने ठगी की रकम के डिजिटल ट्रेल का विश्लेषण किया। पुलिस के अनुसार, ठगी की रकम से Ajio वेबसाइट के जरिए 1 ग्राम की सोने की बार खरीदी गई, जिसे दिल्ली के तिलक नगर में एक संदिग्ध पते पर डिलीवर किया गया।
तकनीकी जांच में फर्जी बैंक वेबसाइट से जुड़े सुराग मिले। पुलिस के मुताबिक, गौरव शर्मा ने फर्जी वेबसाइट तैयार की थी, जबकि रौनक ने वेबसाइट बनाने के लिए भुगतान की व्यवस्था की थी।
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने करण उर्फ काके और राकेश कुमार उर्फ राणा की पहचान की। दोनों पर आरोप है कि वे मंगोलपुरी में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर से बैंक प्रतिनिधि बनकर लोगों को फोन करते थे और क्रेडिट कार्ड की गोपनीय जानकारी हासिल करते थे।
वहीं, पुलिस के अनुसार आरोपी फैजान की भूमिका सिम कार्ड और मोबाइल फोन उपलब्ध कराने वाले facilitator के तौर पर सामने आई। इनका इस्तेमाल आरोपियों द्वारा अपनी पहचान छिपाने और साइबर ठगी को अंजाम देने के लिए किया जाता था।
9 सितंबर को छापेमारी, पांचों आरोपी गिरफ्तार
साइबर पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एक विशेष टीम का गठन किया। टीम में SI मोहित कुमार, ASI मनोज, HC संदीप कुमार, कांस्टेबल अभिषेक और कांस्टेबल कपिल शामिल थे। टीम ने इंस्पेक्टर राहुल कुमार, SHO/साइबर पुलिस स्टेशन, उत्तर-पूर्वी जिला की निगरानी में कार्रवाई की।
9 सितंबर 2026 को छापेमारी कर करण उर्फ काके और राकेश कुमार उर्फ राणा को पकड़ा गया। पूछताछ और आगे की तकनीकी जांच के आधार पर फैजान, गौरव शर्मा और रौनक को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक पूछताछ में आरोपियों ने साइबर ठगी के तरीके और अपने अन्य सहयोगियों के बारे में जानकारी दी है। हालांकि, मामले में आगे की जांच जारी है।
आठ मोबाइल फोन और लैपटॉप बरामद
पुलिस ने जांच के दौरान कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। इनमें करण उर्फ काके के पास से पीड़ित से संपर्क के लिए इस्तेमाल किया गया एक मोबाइल फोन। करण और राकेश के पास से आठ अन्य मोबाइल फोन, जिनसे संभावित पीड़ितों से संपर्क किया जाता था। गौरव शर्मा के पास से एक लैपटॉप, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर फर्जी बैंक वेबसाइट बनाने और संचालित करने में किया गया। बरामद मोबाइल नंबरों से जुड़े 14 NCRP शिकायतों को देश के अलग-अलग हिस्सों से जोड़ा गया है।
ऐसे बनाते थे लोगों को शिकार
पुलिस के मुताबिक, गिरोह का तरीका बेहद सुनियोजित था। आरोपी खुद को बैंक का प्रतिनिधि बताकर संभावित पीड़ितों को फोन करते थे और क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का लालच देते थे।
इसके बाद पीड़ितों को बैंक जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइट पर भेजा जाता था। वेबसाइट पर क्रेडिट कार्ड की जानकारी दर्ज करवाने के बाद आरोपी उस जानकारी का इस्तेमाल अनधिकृत लेनदेन के लिए करते थे।
पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों और सहयोगियों की पहचान करने में जुटी है। साथ ही ठगी की बाकी रकम और अपराध से जुड़े अन्य लाभ को ट्रेस करने तथा बरामद करने की कोशिश की जा रही है।
पुलिस की अपील
साइबर ठगी से बचने के लिए लोगों को सलाह दी जाती है कि वे फोन पर किसी अनजान व्यक्ति के साथ क्रेडिट कार्ड नंबर, CVV, OTP, PIN या अन्य गोपनीय बैंकिंग जानकारी साझा न करें। किसी भी बैंकिंग सेवा के लिए केवल बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप का इस्तेमाल करें।

