असल न्यूज़: पुलिस वालों को ‘ब्लैकमेल’ कर वसूली करने वाले गैंग पर महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट (MCOCA) लगा दिया गया है। क्राइम ब्रांच की एंटी रॉबरी एंड स्नैचिंग सेल (ARSC) ने सोमवार को केस दर्ज किया। गिरोह के सरगना राजकुमार उर्फ राजू मीणा (45) को मंडे को ही अरेस्ट कर लिया। इसे मंगलवार को कड़कड़डूमा कोर्ट में पेश किया, जहां से सात दिन की रिमांड मिली।
आरोपी के खिलाफ दर्ज हैं इतने केस
भजनपुरा के वेस्ट घोंडा निवासी मुख्य आरोपी पर एक्सटॉर्शन, डकैती और हमला करने समेत सात केस दर्ज हैं। इससे पूछताछ के बाद गैंग के अन्य मेंबर भी जल्द गिरफ्तार किए जाएंगे। पुलिस अफसरों ने बताया कि यह एक्सटॉर्शन गैंग नॉर्थ ईस्ट जिले में 2018 से सक्रिय है, जो ज्यादातर ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को टारगेट करता है।
पैसे नहीं देने पर वीडियो वायरल की दी धमकी
ट्रैफिक स्टाफ से कथित तौर पर ‘रिश्वत’ लेते हुए का विडियो होने का दावा किया जाता है। इसके बाद एक लाख से लेकर पांच लाख रुपये तक की एक्सटॉर्शन मनी मांगते हैं। पैसा नहीं देने पर गैंग मेंबर आला अफसरों के साथ और सोशल मीडिया पर विडियो शेयर कर करियर बर्बाद करने की धमकी देते हैं। कई पुलिसकर्मी इस गिरोह के जाल में फंसे, जिन्होंने मोटी रकम देकर पीछा छुड़ा लिया।
जबरन उगाही करने के सात केस
पुलिस वालों से जबरन उगाही करने वाले इस गैंग के खिलाफ 2018 से 2025 तक मिली शिकायतों पर नॉर्थ ईस्ट जिले के अलग-अलग थानों में सात केस दर्ज किए गए। ज्योति नगर थाने में दो, भजनपुरा में दो, सीलमपुर, शास्त्री पार्क और नंद नगरी में एक-एक एफआईआर दर्ज हुई।
जनवरी में दर्ज हुए तीन केस
तीन केस इसी साल जनवरी में शास्त्री पार्क और भजनपुरा, जबकि मई में नंद नगरी में हुए। नॉर्थ ईस्ट जिले के तत्कालीन डीसीपी संजय कुमार सैन ने 24 फरवरी 2022 को एक एसआई के बेटे को वसूली करते हुए गिरफ्तार करवाया तो ‘पीड़ित’ अन्य पुलिस वाले भी सामने आने लगे।
दिल्ली पुलिस का SI भी रहा आरोपी
पुलिस अफसरों के मुताबिक, एसआई सुरेंद्र और उसके बेटे उपेंद्र का नाम ज्योति नगर में फरवरी 2022 में दर्ज केस में आया। करावल नगर निवासी एसआई ने कॉल कर ट्रैफिक स्टाफ से विडियो होने का दावा कर तीन लाख मांगे थे। बेटे उपेंद्र को रकम लेने भेजा तो पुलिस ने रंगेहाथ अरेस्ट किया।
जांच में ये नाम आए सामने
आरोपी एसआई लंबे समय तक फरार रहा। सभी केसों की जांच के दौरान राजकुमार उर्फ राजू मीणा, वकील, कादिर, शोएब अंसारी, संजय गुप्ता, रियाजुद्दीन, राजबीर बंसल और मुकेश कुमार उर्फ पकौड़ी के नाम सामने आए।
जमानत मिलते ही फिर हो जाते शुरू
पुलिस अफसरों के मुताबिक, अधिकतर पीड़ित पुलिस वाले करियर के डर की वजह से इन्हें रकम दे देते थे, जिससे गिरोह के हौसले बुलंद होते चले गए। कुछ ने सामने आकर एक्सटॉर्शन के तहत केस करवाया। लेकिन सात साल से कम की सजा होने से आरोपी जमानत लेने में सफल रहते और फिर इसी काम में जुट जाते थे। कुछ मामलों में अग्रिम जमानत लेने में भी सफल रहे थे। इसलिए गैंग पर मकोका लगाने का फैसला किया गया, ताकि आरोपी लंबे समय तक जेल में रहें और इनकी ‘अवैध’ प्रॉपर्टी भी अटैच की जा सके।

