असल न्यूज़: दिल्ली मेट्रो के ऑफिसर की पूरे परिवार के साथ दर्दनाक मौत के बाद मंगलवार सुबह बाबू जगजीवन राम अस्पताल की मोर्चरी में मातम पसरा रहा। गमगीन परिजन, DMRC के अधिकारी और कर्मचारी और पड़ोसी यहां मौजूद रहे। हर कोई हैरान और परेशान नजर आ रहा था। हादसे को लेकर तरह-तरह की आशंकाएं और सवाल उठते दिखे। पड़ोसी बताते रहे कि रात में ही परिवार से मुलाकात हुई थी। सुबह पूरे परिवार के खत्म होने की खबर से आसपास के लोग भी डरे और सहमे हुए हैं।
उज्जैन का रहने वाला था परिवार
DMRC के अधिकारियों ने बताया कि अजय ने साल 2006 में DMRC जॉइन की थी। परिवार मूल रूप से मध्य प्रदेश के उज्जैन का रहने वाला था। अजय के पिता दीनानाथ इंस्पेक्टर पद से रिटायर थे, जिनका पिछले साल रक्षाबंधन के दिन निधन हो गया था। अजय की बड़ी बहन ऊषा शादीशुदा है और परिवार के साथ नोएडा में रहती है। हादसे की सूचना मिलते ही वह मंगलवार सुबह मोर्चरी पहुंच गई। वहीं, अजय के बड़े भाई मनोज यूपी पुलिस में इंस्पेक्टर है और हाथरस में तैनात है। वो भी सुबह मोर्चरी पहुंचे।
पड़ोसियों ने बालकनी से लपटें निकलती देखीं
पुलिस के मुताबिक, लोगों को मंगलवार तड़के करीब ढाई बजे धमाके की आवाज सुनाई दी, लेकिन आसपास निर्माण कार्य और ट्रकों की आवाजाही के कारण अनसुना कर दिया। बाद में चौथे फ्लोर के पड़ोसियों ने बालकनी से लपटें निकलती देखी। पुलिस और दमकल कर्मियों को सेंट्रल लॉक तोड़कर अंदर जाना पड़ा। DMRC के एक अधिकारी ने बताया कि आशंका है कि कार्बन मोनोऑक्साइड भरने से परिवार बेहोश हो गया।
आग सिर्फ बेडरूम तक ही सीमित रही
अधिकारियो ने बताया कि अगर कोई भी मेंबर होश में होता तो वह कमरे में हवा के लिए दरवाजा या खिड़की खोल सकता था लेकिन ऐसा नहीं हो सका। पुलिस को यह भी आशंका है कि गैस चेंबर बनने की वजह से जोरदार धमाका हुआ होगा। जांच में सामने आया है कि पूरे फ्लैट में आग नहीं फैली थी। आग सिर्फ बालकनी साइड वाले बेडरूम तक ही सीमित रही, जो खाक हो गया। तीनो के शव बेड पर जली हालत में मिले। अंदेशा है कि हीटर या ब्लोअर में स्पार्क हुआ होगा।
सुरक्षा के सवालों पर DMRC का जवाब
स्टाफ क्वार्टर में सुरक्षा मानको को लेकर उठ रहे सवालों पर DMRC अधिकारियो ने साफ किया कि सभी सरकारी नियमो A का पूरी तरह पालन किया गया है। हर फ्लैट में प्रॉपर वेंटिलेशन, बड़ा हॉल, बेडरूम, अलग किचन, बाथरूम, टॉयलेट और बालकनी है। कॉलोनी में फायर सिस्टम पहले से लगा हुआ है। वॉटर, फायर और अन्य सभी जरूरी सेफ्टी सिस्टम की एनओसी समय-समय पर अपडेट की जाती है।
2016 से क्वॉर्टर में था परिवार
अधिकारियों ने बताया कि अजय परिवार के साथ इस सोसाइटी में साल 2016 से रह रहे थे। उसी साल यह कॉलोनी बनकर तैयार हुई थी और DMRC स्टाफ्स को यहां क्वार्टर दिए गए थे। अजय असिस्टेंट सेक्शन इंजीनियर थे और फिलहाल उनकी तैनाती बाराखंबा मेट्रो स्टेशन पर थी। परिजनों और पड़ोसियों के मुताबिक अजय विमल बेहद मिलनसार और विनम्र स्वभाव के थे। उनकी बेटी मॉडल टाउन के क्वीन मैरी स्कूल में चौथी क्लास में पढ़ती थी।

