Monday, January 12, 2026
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मौनी अमावस्या पर करें ये 5 काम, पितृ दोष से मिल जाएगी मुक्ति! नाराज पितरों का भी मिलेगा आशीर्वाद

असल न्यूज़: मौनी अमावस्या माघ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है. मौनी अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान करते हैं, उसके बाद दान किया जाता है. इससे पाप मिटते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन तीर्थ स्नान करने से भगवान विष्णु की कृपा सहज ही प्राप्त हो जाती है. जो लोग पितृ दोष से परेशान हैं या उनके पितर नाराज हैं, जिसकी वजह से पूरे परिवार की उन्नति नहीं हो रही है, कष्टों का सामना करना पड़ रहा है, उनको मौनी अमावस्या के दिन कुछ उपाय करने चाहिए. आज हम आपको मौनी अमावस्या पर किए जाने वाले उन 5 उपायों के बारे में बता रहे हैं, जिसको करने से आपको पितृ दोष से मुक्ति मिल सकती है और आपके नाराज पितर भी खुश होकर आशीर्वाद देंगे.

मौनी अमावस्या कब है: मौनी अमावस्या के उपायों को जानने से पहले आपको बता दें कि इस साल मौनी अमावस्या 18 जनवरी दिन रविवार को है. पंचांग के अनुसार माघ कृष्ण अमावस्या यानि मौनी अमावस्या की तिथि 18 जनवरी को 12:03 ए एम से लेकर 19 जनवरी को 1:21 ए एम तक है.

मौनी अमावस्या पर पितृ दोष मुक्ति के उपाय-गंगाजल से दें तर्पण: मौनी अमावस्या के दिन आप प्रयागराज के संगम में स्नान करें. कहा जाता है संगम स्नान से पुण्य के साथ भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है. स्नान के बाद अपने पितरों का स्मरण करें और गंगा के जल से उनको तर्पण दें. मां गंगा मोक्षदायिनी हैं, उनकी कृपा से पितरों का उद्धार हो जाएगा. आपके नाराज पितर भी खुश होकर आशीर्वाद देंगे. तर्पण के समय हाथ में कुशा की पवित्री धारण करें. कुशा के पोरों से जल पितरों को तर्पित करें.

पितरों के लिए दान: मौनी अमावस्या के दिन स्नान के बाद दान जरूर करना चाहिए. इस दिन आप अपनी क्षमता के अनुसार अन्न का दान करें. पितरों के लिए सफेद वस्त्र का दान किया जाता है. ऐसे में आप मौनी अमावस्या पर अपने पितरों के लिए सफेद रंग के गरम कपड़ों का दान करें.

त्रिपिंडी श्राद्ध: यदि आपको पितृ दोष है या आपके पितर किन्हीं भी कारणों से परेशान करते हैं तो आप काशी, गया या त्र्यंबकेश्वर में पितरों के लिए त्रिपिंडी श्राद्ध कराएं. त्रिपिंडी श्राद्ध कराने से पितृ दोष शांत हो जाता है. पितरों की नाराजगी दूर होती है. वे खुश होकर उन्नति का आशीर्वाद देते हैं. त्रिपिंडी श्राद्ध अपने तीन पीढ़ियों के पूर्वजों के लिए किया जाता है, जिनकी आत्मा दुखी है, वे शांत और तृप्त हो जाते हैं. इस श्राद्ध में ब्रह्मा, विष्णु और महेश की पूजा का विधान है. श्राद्ध के समय पूर्वजों को अन्न से बनाया गया पिंड दान करते हैं.

पितृ दोष से मुक्ति का पाठ: मौनी अमावस्या के दिन नाराज पितरों को प्रसन्न करने या पितृ दोष से मुक्ति के लिए पितृ सूक्त या पितृ कवच का पाठ करना चाहिए. इसके अलावा आप चाहें तो गीता के सातवें अध्याय का पाठ कर सकते हैं. इससे पितृ दोष मिटता है, वहीं पितर प्रेत योनि से मुक्ति पा सकते हैं.

दीया जलाना: मौनी अमावस्या की शाम जब सूर्य डूब जाता है तो पितर पितृ लोक वापस लौटने लगते हैं. ऐसे में आपको अपने पितरों के लिए घर के बाहर दक्षिण दिशा में सरसों के तेल का एक दीपक जलाना चाहिए. उनका मार्ग प्रकाश से आलोकित होता है, इसे देखकर वे खुश होते हैं और आशीर्वाद देते है. इस दिन पीपले के पेड़ के नीचे भी दीपक जलाया जाता है.

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