Monday, January 12, 2026
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दिल्ली में डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसा NRI कपल, 8 खातों में ट्रांसफर कराए 15 करोड़.

असल न्यूज़: देश की राजधानी दिल्ली से एक चौंका देने वाली घटना सामने आई है. अमेरिका में करीब 48 साल तक डॉक्टर के रूप में काम करने वाले एनआरआई दंपति ओम तनेजा और उनकी पत्नी इंदिरा तनेजा से साइबर ठगों ने 15 करोड़ रुपये ठग लिए. रिटायरमेंट के बाद दंपति भारत लौट आया था और यहां सामाजिक कार्यों में जुड़े थे, लेकिन उनकी जिंदगी की कमाई कुछ ही दिनों में लुट गई.

ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग बताकर ठगा

धोखाधड़ी की शुरुआत 24 दिसंबर से हुई. जालसाजों ने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर दंपति को फोन किया और कहा कि उनके खिलाफ गंभीर मामले दर्ज हैं. उन्हें बताया गया कि मनी लॉन्ड्रिंग और राष्ट्रीय सुरक्षा के उल्लंघन के आरोप उन पर लगाए गए हैं और उन पर पीएमएलए कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी. जालसाजों ने गिरफ्तारी का डर दिखाकर दंपति को मानसिक रूप से डरा दिया.

जालसाजों ने दंपति को एक खतरनाक जाल में फंसा दिया. 24 दिसंबर की सुबह से लेकर 10 जनवरी तक लगातार वीडियो कॉल पर उन्हें निगरानी में रखा गया. इस दौरान दंपति सामान्य जीवन भी नहीं जी पाए. हर समय वीडियो कॉल चालू रखने के लिए कहा गया और बाहर किससे कैसे बात करनी है, यह सब ठग ही तय करते थे. फोन कॉल के दौरान अगर पत्नी बात करती, तो पति के फोन पर तुरंत वीडियो कॉल कर उसकी भी निगरानी की जाती. दंपति मानसिक दबाव में इतने टूट गए कि जालसाजों ने जो कहा, वही करते गए.

8 अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कराए 15 करोड़

लगातार धमकियां और निगरानी के बीच दंपति से अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करवाई गई. कभी 2 करोड़ और कभी 2.10 करोड़ इस तरह कुल 8 खातों में लगभग 14 करोड़ 85 लाख रुपये भेजने पड़े. दंपति को भरोसा दिलाया गया कि जांच के लिए पैसे जरूरी हैं और बाद में पूरी रकम उन्हें वापस कर दी जाएगी.

10 जनवरी को इंदिरा तनेजा को जालसाजों ने खुद ही थाने जाने को कहा. उन्होंने कहा कि RBI पूरे पैसे वापस कर देगा और स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी है. जब इंदिरा थाने पहुंचीं और पुलिस के सामने वीडियो कॉल पर जालसाजों से बात की, तभी पूरा सच सामने आया. पुलिस ने बताया कि वह एक बड़े साइबर फ्रॉड का शिकार हुई हैं.

साइबर सेल करेगा ठगी की जांच

दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है. साइबर शाखा के विशेष विभाग ‘इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस’ (IFSO) को जांच सौंपी गई है. पुलिस अब उन बैंक खातों और कॉल करने वालों की पहचान कर रही है. यह मामला साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने की एक बड़ी चेतावनी है कि डराकर या धमकाकर कोई भी एजेंसी पैसे नहीं मांगती.

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