असल न्यूज़: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के दावों के बाद दुनियाभर में शिया समुदाय में गहरा शोक देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि अमेरिका-इजरायल के हमले में उनकी मृत्यु हुई, जिसके विरोध में भारत के कई हिस्सों—कश्मीर, लद्दाख से लेकर लखनऊ तक—प्रदर्शन हुए। कई स्थानों पर लोगों ने काले कपड़े पहनकर मातम मनाया और विरोध मार्च निकाले।
लखनऊ में एक प्रदर्शनकारी भावुक होते हुए कहता है, “हमारे सिर से उनका साया उठ गया।” वहीं जम्मू-कश्मीर के रामबन में एक महिला प्रदर्शनकारी ने कहा, “खामेनेई हमारे सुप्रीम लीडर थे, वे हमारे सभी मौलानाओं से ऊपर थे। अमेरिका ने उन्हें शहीद कर दिया।”
शिया समुदाय के लिए क्यों थे अहम?
दुनियाभर में करोड़ों शिया मुसलमानों के लिए खामेनेई केवल एक राष्ट्राध्यक्ष नहीं थे। वे शिया इस्लाम में एक प्रभावशाली धार्मिक-वैचारिक मार्गदर्शक माने जाते थे। कई समुदाय उन्हें अपने आध्यात्मिक अभिभावक के रूप में देखते थे।
उनके भाषण और संदेश केवल तेहरान तक सीमित नहीं रहते थे, बल्कि लखनऊ और हैदराबाद के इमामबाड़ों, क़ुम और नजफ़ के मदरसों, तथा कारगिल और श्रीनगर के शिया बहुल इलाकों तक सुने जाते थे। यही कारण है कि उनकी मौत की खबर ने वैश्विक स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया पैदा की है।
भारत में असर
भारत के विभिन्न शहरों में शोक सभाएं और विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए। धार्मिक नेताओं ने इसे शिया समुदाय के लिए “बड़ी आध्यात्मिक क्षति” बताया।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस घटना को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और भू-राजनीतिक असर को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
निष्कर्ष
अयातुल्लाह अली खामेनेई का प्रभाव केवल ईरान की राजनीति तक सीमित नहीं था। वे शिया समुदाय के लिए एक वैचारिक और धार्मिक प्रतीक थे। ऐसे में उनकी मौत की खबर पर वैश्विक स्तर पर गहरा शोक और विरोध स्वाभाविक माना जा रहा है।

