अजय शर्मा: उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के मुकरबा चौक इलाके से अवैध तरीके से टैक्सियां चलाए जाने का मामला सामने आए हैं।यहां से सोनीपत, पानीपत, अंबाला, चंडीगढ़, लुधियाना और जालंधर जैसे शहरों के लिए निजी (पर्सनल) नंबर प्लेट वाली गाड़ियां टैक्सी के रूप में संचालित की जा रही हैं, जिससे सरकार को टैक्स और टोल के रूप में राजस्व का नुकसान हो रहा है।
बता दें इन गाड़ियों से प्रति वाहन 3,000 से 4,000 रुपये तक की मासिक अवैध वसूली की जाती है। इस पूरे नेटवर्क में कुछ स्थानीय पुलिसकर्मियों और ट्रैफिक कर्मियों की कथित मिलीभगत है।
लाइसेंस और फिटनेस जांच पर सवाल
वहीं कथित अवैध वसूली के कारण कई गाड़ियों की न तो ड्राइविंग लाइसेंस जांच होती है, न ही प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) और फिटनेस की नियमित जांच की जाती है।
इसके अलावा, कुछ ऐसे वाहन भी संचालन में बताए जा रहे हैं जो दिल्ली सरकार के नियमों के तहत प्रतिबंधित हैं—जैसे 10 साल पुराने पेट्रोल और 15 साल पुराने डीजल वाहन।
दिल्ली में किन रूटों से प्रवेश?
बता दें कि ये वाहन हरियाणा के सिंघु बॉर्डर से दिल्ली में प्रवेश करते हैं और मुकरबा चौक बाईपास तक पहुंचते हैं। इस मार्ग में नरेला, बादली और बुराड़ी ट्रैफिक सर्किल क्षेत्र आते हैं।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि सिंघु बॉर्डर, अंबर कट, टिकरी, खामपुर, पल्ला मोड़, जिंदपुर, साई मंदिर, जैन मंदिर, सीरसपुर, लिबासपुर और मुकरबा चौक जैसे बिंदुओं से होकर गाड़ियां गुजरती हैं। इन सभी प्वाइंटों पर एक तय राशि इन टैक्सियों से एंट्री के नाम पर ली जाती है
आपको यह भी बता दें कि इस मामले को लेकर कई बार आला अधिकारियों को जानकारी भी दी गई है लेकिन यहां कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया और यहां अवैध टेक्सी का कारोबार धड़ल्ले से फल फूल रहा है

