नई दिल्ली। तेलंगाना की सरकारी कोयला कंपनी सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (SCCL) से करीब 40 लाख टन कोयला गायब होने के आरोपों ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। आरोप है कि गायब कोयले की कीमत लगभग 1600 करोड़ रुपये है। मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी ने तेलंगाना सरकार से तत्काल जांच कराने की मांग की है।
केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी को लिखे पत्र में कहा है कि विभिन्न रिपोर्टों में SCCL के रिकॉर्ड में दर्ज करीब 40 लाख टन कोयले के गायब होने की बात सामने आई है, जिससे कंपनी को भारी वित्तीय नुकसान हो सकता है।
वहीं, भारत राष्ट्र समिति (BRS) के नेता के.टी. रामाराव (KTR) ने भी इस मामले में व्यापक जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि कंपनी के रिकॉर्ड में मौजूद बताए गए कोयले का भौतिक सत्यापन करने पर वह स्टॉक नहीं मिला। KTR ने दावा किया कि यह कोयला कथित रूप से अवैध रूप से बेचा गया हो सकता है, जिससे सरकारी कंपनी को करीब 1600 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
SCCL में तेलंगाना सरकार की 51 प्रतिशत और केंद्र सरकार की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है। ऐसे में मामला सामने आने के बाद कंपनी के संचालन, निगरानी व्यवस्था और आंतरिक नियंत्रण तंत्र पर भी सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि अभी तक किसी जांच एजेंसी ने आधिकारिक रूप से 40 लाख टन कोयला गायब होने या 1600 करोड़ रुपये के घोटाले की पुष्टि नहीं की है। केंद्र और राज्य सरकार दोनों स्तरों पर मामले की जांच की मांग उठ रही है और अंतिम सच्चाई जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
मामले ने तेलंगाना की राजनीति में भी नया विवाद खड़ा कर दिया है और आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

