MCD नरेला जॉन के अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा अवैध मछली-मुर्गी बाजार
असल न्यूज़। अलीपुर इलाके में दिल्ली नगर निगम (MCD) के नरेला जोन की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि अलीपुर नंबर-6 ट्रेन के पास सड़क किनारे कथित तौर पर अवैध मछली और मुर्गी का बाजार लंबे समय से संचालित किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बाजार लगने से सड़क पर जाम की स्थिति भी बनती है और राहगीरों तथा वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

13 सितंबर को MCD कंट्रोल रूम में शिकायत, MCD नरेला जॉन के वेट्री इंस्पेक्टर राजेंद्र मेहता ने नहीं की शिकायत पर कार्रवाई
इस मामले को लेकर 13 सितंबर को MCD नरेला जोन के कंट्रोल रूम में शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसका डायरी नंबर 2293 बताया गया है। शिकायत के संबंध में कंट्रोल रूम से संपर्क करने पर कर्मचारियों की ओर से बताया गया कि मामले की जानकारी Veterinary Department को दे दी गई है।
हालांकि, शिकायत के बावजूद मौके पर कथित मछली-मुर्गी बाजार के संचालित होने का दावा किया जा रहा है। MCD की आधिकारिक वेबसाइट पर नरेला जोन और Veterinary Services से संबंधित विभागीय सेवाएं दर्ज हैं।
अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप
स्थानीय सूत्रों के हवाले से यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि कथित बाजार में संचालित दुकानों से प्रति दुकान हर महीने करीब 1,000 रुपये की रकम वसूली जाती है और यह रकम कथित तौर पर MCD के कुछ अधिकारियों तक पहुंचाई जाती है। आरोपों में Veterinary Department के कुछ अधिकारियों की कथित भूमिका का भी जिक्र किया जा रहा है।
PWD की जमीन पर कारोबार का दावा
बताया जा रहा है कि जिस स्थान पर यह कथित बाजार संचालित हो रहा है, वह जमीन PWD Division-13 के अधीन आती है। आरोप है कि संबंधित स्थान पर कथित अवैध गतिविधियों के बावजूद कार्रवाई नहीं की जा रही है।
इस मामले में MCD के साथ-साथ PWD की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि सड़क किनारे बिना अनुमति कारोबार किया जा रहा है तो संबंधित विभागों की ओर से निरीक्षण और कार्रवाई की आवश्यकता है।

बाजार लगने से ट्रैफिक पर भी असर
स्थानीय लोगों का कहना है कि बाजार लगने के दौरान सड़क के किनारे बड़ी संख्या में दुकानें और खरीदार जमा हो जाते हैं। इससे सड़क पर यातायात प्रभावित होता है और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण कर यह स्पष्ट करें कि दुकानदारों के पास कारोबार के लिए आवश्यक अनुमति या लाइसेंस हैं या नहीं और यदि बाजार अवैध है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि 13 सितंबर को शिकायत दर्ज होने के बावजूद कथित बाजार के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई? शिकायत डायरी नंबर 2293 पर हुई कार्रवाई का रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण होगा।
वहीं अधिकारियों की कथित मिलीभगत से ही इस तरह के अवैध बाजार चलाई जा रहे हैं जिन पर प्रशासनिक अधिकारी रोक लगाने में नाकाम है क्योंकि हर महीने उन्हें एक मोटी रकम पहुंचती है. अब देखने वाली बात ही होगी कि मौजूदा सरकार भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करती है या पर ये अवैध बाजार इसी तरह चलता रहेगा और भ्रष्ट अधिकारी अपनी जेब भरते रहेंगे.

