असल न्यूज़: हर साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि पर होलिका दहन का पर्व मनाया जाता है, जिसका हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। मान्यता है कि होलिका की अग्नि जीवन में फैली बुराइयों और नकारात्मकता को दूर करती है।
इस वर्ष फाल्गुन पूर्णिमा 3 मार्च 2026 को पड़ रही है, लेकिन इस दिन साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने के कारण होलिका दहन नहीं किया जाएगा। यह ग्रहण भारत में दृश्य होगा और सूतक काल मान्य रहेगा। सूतक काल के दौरान पूजा-पाठ और शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। इसलिए होलिका दहन 2 मार्च 2026 को किया जाएगा।
होलिका दहन के दिन क्या करें?
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होलिका दहन शाम के समय किया जाता है, जबकि सुबह महिलाएं शुभ मुहूर्त में होलिका पूजन करती हैं।
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फाल्गुन पूर्णिमा का व्रत रखना शुभ माना गया है। उपवास के बाद विधि-विधान से पूजा करें।
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घर की उत्तर दिशा में घी का दीपक जलाना सुख-समृद्धि के लिए शुभ माना जाता है।
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पूजा में सरसों, तिल, 11 सूखे गोबर के उपले, अक्षत, चीनी, गेहूं के दाने और गेहूं की बाली का प्रयोग करें।
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पूजा के बाद होलिका की 7 परिक्रमा लगाकर जल अर्पित करें और दान करें।
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ध्यान रखें कि होलिका की पूजा ठंडी की जाती है, यानी होलिका के पास दीपक नहीं जलाया जाता।
होलिका दहन के दिन क्या न करें?
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इस दिन किसी को उधार न दें, इससे बरकत रुकने की मान्यता है।
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पूजा के समय पीले और सफेद रंग के वस्त्र पहनने से बचें।
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महिलाओं को पूजा के दौरान बाल खुले रखने चाहिए।
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होलिका दहन की रात सड़क पर पड़ी वस्तुओं को हाथ न लगाएं।
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धार्मिक मान्यता के अनुसार नवविवाहित लड़की को ससुराल में होलिका दहन की अग्नि नहीं देखनी चाहिए।
होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। सही तिथि, शुभ मुहूर्त और नियमों का पालन करते हुए यह पर्व मनाने से जीवन में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

