असल न्यूज़: राजधानी दिल्ली में बिजली उपभोक्ताओं को जल्द ही महंगी बिजली का सामना करना पड़ सकता है। खासतौर पर वे उपभोक्ता जो हर महीने 500 यूनिट से अधिक बिजली की खपत करते हैं, उनकी जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की संभावना है।
जानकारी के अनुसार, बिजली वितरण कंपनियों ने पावर परचेज एडजस्टमेंट चार्ज (PPAC) के तहत अतिरिक्त शुल्क लागू करने की प्रक्रिया शुरू की है। PPAC वह व्यवस्था है जिसके माध्यम से बिजली उत्पादन कंपनियों से बिजली खरीदने की बढ़ी हुई लागत को उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है, कि पिछले कुछ समय में कोयला और अन्य ईंधन की कीमतों में वृद्धि होने के कारण बिजली उत्पादन लागत बढ़ी है। इसका सीधा असर बिजली खरीद लागत पर पड़ा है, जिसे अब बिजली कंपनियां PPAC के जरिए उपभोक्ताओं से वसूल रही हैं।
बताया जा रहा है, कि 500 यूनिट से अधिक बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं के बिल में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। हालांकि, अंतिम प्रभाव बिजली वितरण कंपनी और लागू दरों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है, कि बढ़ती उत्पादन लागत और ईंधन कीमतों के कारण बिजली क्षेत्र पर वित्तीय दबाव बढ़ा है। ऐसे में बिजली कंपनियां लागत संतुलित करने के लिए PPAC जैसे प्रावधानों का सहारा ले रही हैं।
फिलहाल उपभोक्ताओं की नजर इस बात पर है, कि नई दरों का उनके मासिक बिजली बिल पर कितना असर पड़ेगा। आने वाले महीनों में बढ़े हुए शुल्क का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है।

