नई दिल्ली। दिल्ली में कथित तौर पर 15 लाख मकानों पर बुलडोजर कार्रवाई होने के दावे ने लोगों के बीच चिंता बढ़ा दी है। सोशल मीडिया और कुछ वीडियो रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि राजधानी में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी है, जिससे लाखों मकान प्रभावित हो सकते हैं।
हालांकि अब तक किसी सरकारी एजेंसी, दिल्ली सरकार, एमसीडी या डीडीए की ओर से यह आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है कि दिल्ली में 15 लाख मकानों को तोड़ा जाएगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हाल के महीनों में दिल्ली के विभिन्न इलाकों में अदालतों के आदेश और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के तहत सीमित स्तर पर बुलडोजर अभियान चलाए गए हैं।
दिल्ली में शालीमार बाग, वज़ीरपुर, अशोक विहार, तैमूर नगर और कुछ अन्य क्षेत्रों में अतिक्रमण हटाने और अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इन कार्रवाइयों में सैकड़ों मकान और ढांचे प्रभावित हुए, लेकिन 15 लाख मकानों को लेकर कोई आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है।
वहीं दिल्ली सरकार की ओर से पहले यह भी कहा गया है कि बिना वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराए झुग्गियों को नहीं हटाया जाएगा और गरीब परिवारों के लिए आवास योजनाओं पर काम किया जा रहा है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी ध्वस्तीकरण कार्रवाई के लिए नोटिस, सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है। सुप्रीम कोर्ट भी पहले बुलडोजर कार्रवाई को लेकर दिशा-निर्देश जारी कर चुका है, जिसमें बिना उचित प्रक्रिया के ध्वस्तीकरण पर रोक संबंधी प्रावधान शामिल हैं।
फिलहाल “दिल्ली में 15 लाख मकानों पर बुलडोजर” का दावा राजनीतिक और सोशल मीडिया बहस का विषय बना हुआ है। इसकी वास्तविकता और प्रभाव को लेकर स्थिति तभी स्पष्ट होगी जब संबंधित सरकारी एजेंसियां या अदालतें कोई आधिकारिक जानकारी जारी करें।

