असल न्यूज़। दिल्ली हाई कोर्ट ने करीब एक दशक से जेल में बंद मुकेश को बड़ी राहत देते हुए उसकी हत्या की सजा सोमवार को पलट दी। कोर्ट ने मामले को हत्या के बजाय गैर-इरादतन हत्या माना और उसे तुरंत रिहा करने का आदेश दिया। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस विकास महाजन की बेंच ने यह फैसला सुनाया।
मामला 13 दिसंबर 2015 को नेब सराय की एक दर्जी की दुकान पर हुई घटना का है। मुकेश और ऋषिपाल साथ काम करते थे और एक ही कमरे में रहते थे। घटना वाले दिन शराब पीने के बाद दोनों में अचानक कहासुनी और हाथापाई हो गई। बताया गया कि विवाद की शुरुआत दरवाजा खोलने में हुई देरी को लेकर हुई थी। झगड़े के दौरान मुकेश ने दुकान में मौजूद कैंची उठाकर ऋषिपाल के पेट में मार दी। जिससे ऋषिपाल की मौत हो गई। निचली अदालत ने इसे हत्या मानते हुए IPC की धारा 302 के तहत मुकेश को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
कोर्ट ने क्या कहा
हाई कोर्ट ने कहा कि घटना अचानक हुए झगड़े के दौरान आवेश में हुई। न तो पहले से हत्या की कोई योजना थी और न ही दोनों के बीच पुरानी दुश्मनी। बेंच ने इसे IPC की धारा 300 के अपवाद 4 के दायरे में माना और दोषसिद्धि को धारा 304 पार्ट-II में बदल दिया। कोर्ट के मुताबिक मुकेश करीब 9 साल 3 महीने जेल में रह चुका है और मिली छूट को जोड़ने पर उसकी सजा 10 साल से ज्यादा हो चुकी है। ऐसे में हाई कोर्ट ने तत्काल रिहाई का आदेश दिया।

