असल न्यूज़। दिल्ली पुलिस की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस ने मोबाइल चोरी के बाद बैंक खातों से पैसे उड़ाने वाले दो-चरणों वाले अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड गैंग का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गैंग मोबाइल चोरी से लेकर फर्जी बैंक खातों के जरिए रकम निकालने तक के लिए अलग-अलग मॉड्यूल में काम करता है। पुलिस ने आरोपियों के पास से 52 मोबाइल फोन, 4 लैपटॉप और करीब 4 लाख रुपये कैश बरामद किए हैं।
सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस को इस पूरे मॉड्यूल का खुलासा उस वक्त होता है, जब 19 जुलाई को वेस्ट पटेल नगर में 88 साल के बुजुर्ग का मोबाइल फोन चोरी होता है। बुजुर्ग 21 जुलाई को अपना सिम दोबारा जारी करवाते हैं, लेकिन इसी बीच उनके खाते से करीब 70 हजार रुपये का ट्रांजेक्शन हो जाता है। इसके बाद बुजुर्ग समझदारी दिखाते हुए पुलिस हेल्पलाइन पर शिकायत करते हैं और 23 जुलाई को मामला दर्ज किया जाता है। जांच आगे बढ़ती है तो पुलिस को गैंग के तीन अलग-अलग लेयर में काम करने की जानकारी मिलती है।
रोहित राजबीर — DCP, सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट, दिल्ली पुलिस- जांच में सामने आता है कि गैंग की पहली लेयर में मोबाइल चोरी करने वाले छोटे अपराधी हैं। दूसरी लेयर में यूपी आधारित आरोपी चोरी के मोबाइल खरीदते हैं, जबकि तीसरी लेयर में जयपुर आधारित टीम बैंक खातों से ट्रांजेक्शन करवाती है। जयपुर में इस गैंग ने बाकायदा एक कॉल सेंटर बनाया हुआ है। पुलिस अब तक 19 साइबर शिकायतों को इस गैंग से लिंक कर चुकी है और अलग-अलग राज्यों से जुड़ी शिकायतों में करीब 65 लाख रुपये की ठगी सामने आ चुकी है।
पुलिस के मुताबिक चोरी किए गए मोबाइल और सिम का इस्तेमाल किए बिना ही बैंक खातों से रकम निकाली जा रही है। इससे आशंका है कि आरोपियों के पास कोई ऐसा सॉफ्टवेयर या तकनीकी सिस्टम मौजूद है, जिसके जरिए वे मोबाइल और सिम के सामान्य इस्तेमाल के बिना ही फ्रॉड को अंजाम दे रहे हैं। इस गैंग में बैंक मैनेजमेंट से जुड़े कुछ कर्मचारी भी शामिल पाए गए हैं, जो फर्जी लाभार्थियों के बैंक अकाउंट खुलवाने में मदद करते हैं। बदले में उन्हें कैश या कमीशन मिलता है। पुलिस के मुताबिक आरोपी इन खातों को बेचने के बजाय उनसे जुड़े LIC अकाउंट खुलवाकर कमीशन हासिल करते हैं।
इस मामले में पुलिस ने अब तक मेरठ, गाजियाबाद और जयपुर से जुड़े 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों का पहले किसी आपराधिक मामले में इन्वॉल्वमेंट नहीं मिला है, हालांकि साइबर क्राइम में इनके शामिल होने की आशंका है और जांच अभी जारी है। पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधी लगातार अपने तरीके बदल रहे हैं, इसलिए पुलिस को भी अपनी जांच और तकनीकी क्षमता लगातार अपडेट करनी होगी।

