असल न्यूज़। नेपाल में आई भीषण त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों के अंतिम संस्कार के बाद बचे अस्थि कलशों को सम्मानपूर्वक भारत लाकर गंगा में विसर्जित करने के लिए श्री देवोत्थान सेवा समिति (पंजी.) ने पहल की है। समिति ने नेपाल प्रशासन को पत्र लिखकर अस्थि कलशों के संग्रहण और विधि-विधान से विसर्जन की अनुमति देने का आग्रह किया है।
श्री देवोत्थान सेवा समिति पिछले करीब 25 वर्षों से भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी अनाम रूप से संग्रहित अस्थि कलशों को दिल्ली लाकर पितृपक्ष के दौरान विशाल यात्रा के माध्यम से हरिद्वार ले जाती है। हरिद्वार के कनखल स्थित सतीघाट पर हजारों अस्थि कलशों का वैदिक रीति-रिवाज के साथ विसर्जन किया जाता है। इस दौरान करीब 100 किलो दूध की धारा के साथ धार्मिक विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया जाता है।
नेपाल प्रशासन को लिखा पत्र
समिति के अध्यक्ष अनिल नरेंद्र ने कहा कि नेपाल में आई भीषण त्रासदी से पूरा विश्व स्तब्ध है। भारत सरकार भी लगातार नेपाल की मदद कर रही है। त्रासदी में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है और प्रशासन द्वारा कई स्थानों पर सामूहिक दाह-संस्कार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि समिति ने मानवीय और धार्मिक जिम्मेदारी के तहत नेपाल प्रशासन को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि यदि प्रशासन उचित समझे तो संस्था को अस्थि कलशों के संग्रहण की अनुमति प्रदान की जाए। इसके बाद इन अस्थि कलशों को सम्मानपूर्वक भारत लाकर मां गंगा के आंचल में विधि-विधान से विसर्जित किया जा सकेगा।
युवा टीम नेपाल जाने को तैयार
समिति अध्यक्ष अनिल नरेंद्र ने बताया कि संस्था की युवा टीम नेपाल जाकर अस्थि कलशों के संग्रहण के लिए तैयार है। उनका कहना है कि यह प्रयास मृतकों को सम्मानजनक अंतिम मोक्ष कर्म प्रदान करने की दिशा में एक छोटा सा मानवीय प्रयास होगा।
पहले भी पाकिस्तान से लाए गए अस्थि कलश
समिति के महामंत्री विजय शर्मा ने बताया कि संस्था इससे पहले भी विदेशों में रखे अनाम अस्थि कलशों के विसर्जन का कार्य कर चुकी है। वर्ष 2011, 2016 और 2025 में पाकिस्तान के कराची शहर में रखे करीब 695 अस्थि कलशों का भी संस्था द्वारा विधिपूर्वक विसर्जन किया गया था।
8 अक्टूबर को निकलेगी 26वीं अस्थि कलश विसर्जन यात्रा
विजय शर्मा ने बताया कि इस वर्ष संस्था की 26वीं अस्थि कलश विसर्जन यात्रा 8 अक्टूबर 2026 को अनाम अस्थि कलशों को लेकर हरिद्वार के लिए रवाना होगी। इसके अगले दिन 9 अक्टूबर 2026 को हरिद्वार के कनखल स्थित सतीघाट पर सभी अस्थि कलशों का वैदिक रीति-रिवाज से विसर्जन किया जाएगा।
समिति का कहना है कि नेपाल प्रशासन से अनुमति मिलने पर वहां की त्रासदी में मृत लोगों के अस्थि कलशों को भी इस धार्मिक यात्रा में शामिल कर उन्हें मां गंगा में ससम्मान विसर्जित करने का प्रयास किया जाएगा।

