
प्रदीप सिंह उज्जैन। दिल्ली नगर निगम (MCD) के नरेला जोन की अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अलीपुर बस स्टैंड क्षेत्र में 2 मई को निगम अधिकारियों द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई थी, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार अगले ही दिन क्षेत्र में फिर से रेहड़ी-पटरी और अस्थायी दुकानें लग गईं।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। उनका कहना है कि अतिक्रमण हटाने के बाद दोबारा दुकानों का लग जाना कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़ा करता है।

लोगों का यह भी आरोप है कि क्षेत्र में अवैध रूप से दुकानें लगाने वालों से कथित रूप से मासिक वसूली की जाती है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
इसके अलावा, कार्रवाई के दौरान सरकारी वाहनों के बजाय प्राइवेट वाहनों के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब नरेला जोन के पास अपने वाहन उपलब्ध हैं, तो निजी वाहनों का उपयोग क्यों किया जा रहा है। उन्होंने इस मामले की जांच की मांग की है।

नागरिकों का कहना है कि यदि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नियमित और निष्पक्ष तरीके से की जाए तो बस स्टैंड क्षेत्र में यातायात व्यवस्था बेहतर हो सकती है और आम लोगों को राहत मिल सकती है।

