असल न्यूज़। नरेला विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत अलीपुर इलाके में दिल्ली नगर निगम के नरेला जोन की कार्यप्रणाली को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अलीपुर में 6 नंबर ड्रेन/गंदे नाले के पास सड़क किनारे अवैध तरीके से मछली और मुर्गा बाजार लगाया जा रहा है। शिकायतों के बावजूद कुछ समय के लिए कार्रवाई होने के बाद बाजार दोबारा लगने का आरोप है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस संबंध में 13 सितंबर को शिकायत संख्या 2293 के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई गई थी। आरोप है कि शिकायत के बाद संबंधित विभाग की ओर से कार्रवाई तो की गई, लेकिन कार्रवाई के बाद दोबारा उसी स्थान पर मछली और मुर्गे की दुकानें लगने लगीं।
इसके बाद स्थानीय स्तर पर दोबारा शिकायत किए जाने की बात सामने आई है, जिसकी शिकायत संख्या 2577 बताई जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।

कार्रवाई के बाद फिर लगने लगा बाजार
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जिस जगह पर बाजार लगाया जा रहा है, वहां सड़क और सार्वजनिक स्थान का इस्तेमाल दुकानों के लिए किया जा रहा है। इससे आसपास गंदगी और यातायात संबंधी परेशानी भी पैदा होने की शिकायत है।
लोगों का कहना है कि यदि किसी स्थान पर अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की जाती है तो उसके बाद दोबारा दुकानें नहीं लगनी चाहिए, लेकिन यहां कार्रवाई के कुछ समय बाद फिर से बाजार दिखाई देने लगता है।
अधिकारियों और कथित वसूली को लेकर गंभीर आरोप
स्थानीय सूत्रों की ओर से कुछ निगम अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, वेटरनरी विभाग के इंस्पेक्टर राजेंद्र मेहता और नरेला जोन में तैनात LI राहुल शेरावत की टीम द्वारा कार्रवाई किए जाने की बात कही जा रही है।
इसके अलावा सूत्रों ने एक चिराग नाम के निजी व्यक्ति के माध्यम से कथित रूप से दुकानदारों से हर महीने पैसे लिए जाने का आरोप लगाया है। दावा किया जा रहा है कि प्रत्येक दुकानदार से करीब 1,000 से 1,500 रुपये प्रतिमाह लिए जाते हैं।
हालांकि, वसूली के इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों या कथित निजी व्यक्ति का पक्ष भी इस संबंध में उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
कार्रवाई से पहले दुकानदारों को सूचना देने का भी आरोप
स्थानीय सूत्रों का एक और आरोप है कि जब भी निगम की ओर से कार्रवाई की तैयारी होती है, तो कथित तौर पर बाजार में बैठे दुकानदारों को पहले ही इसकी जानकारी मिल जाती है। इसके बाद कुछ समय के लिए दुकानें हटा दी जाती हैं और कार्रवाई समाप्त होने के बाद फिर से बाजार लगने लगता है।
यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह निगम की अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है। हालांकि, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।
नरेला औद्योगिक क्षेत्र में भी इसी तरह के बाजार लगाया जा रहा है
स्थानीय लोगों और सूत्रों का दावा है कि नरेला औद्योगिक क्षेत्र में भी इसी तरह मछली बाजार लगाए जाने की शिकायतें हैं। वहां भी कथित तौर पर अवैध दुकानों से वसूली किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले में निगम के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा शिकायतों, कार्रवाई की रिपोर्ट और मौके की वास्तविक स्थिति की जांच किए जाने की जरूरत है।
जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि दिल्ली में अवैध कब्जों और अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन की ओर से कार्रवाई की जा रही है, ऐसे में सार्वजनिक स्थानों पर कथित रूप से दोबारा लगने वाले अवैध बाजारों को लेकर भी स्पष्ट कार्रवाई होनी चाहिए।
लोगों ने मांग की है कि शिकायत संख्या 2293 और 2577 की जांच, मौके पर हुई कार्रवाई की रिपोर्ट और उसके बाद दोबारा बाजार लगने की स्थिति की जांच की जाए। साथ ही यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी या निजी व्यक्ति की मिलीभगत या अवैध वसूली के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि शिकायतों और कथित कार्रवाई के बावजूद अलीपुर में मछली-मुर्गा बाजार दोबारा कैसे लग रहा है?

