Monday, April 6, 2026
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दिल्ली में ‘स्टिकर उगाही सिंडिकेट’ का भंडाफोड़: ASI और कांस्टेबल गिरफ्तार.

अजय शर्मा: राजधानी दिल्ली में लंबे समय से चल रहे ‘स्टिकर उगाही सिंडिकेट’ का पर्दाफाश हुआ है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस मामले में पहली बार दो पुलिसकर्मियों—एक असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) और एक कांस्टेबल—को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि यह रैकेट करीब 10 साल से सक्रिय था और इसमें पुलिस व उगाही गिरोह के बीच गहरा गठजोड़ था।


🟩 क्या है पूरा मामला?

6 अप्रैल 2026 को हुई इस कार्रवाई में क्राइम ब्रांच ने ASI जितेंद्र और कांस्टेबल प्रवीण को गिरफ्तार किया। आरोप है कि दोनों पुलिसकर्मी उगाही सिंडिकेट को लॉजिस्टिक सपोर्ट देने और गिरोह के सरगनाओं के साथ तालमेल बनाए रखने में शामिल थे।

DCP (क्राइम) संजीव यादव के अनुसार, मामले में कम से कम चार और पुलिसकर्मी जांच के दायरे में हैं।


🟧 ‘स्टिकर उगाही सिंडिकेट’ कैसे करता था काम?

जांच में खुलासा हुआ कि यह सिंडिकेट ट्रैफिक और प्रदूषण नियमों से बचने के लिए एक समानांतर अवैध सिस्टम चला रहा था।

  • कमर्शियल वाहनों को नकली स्टिकर बेचे जाते थे
  • हर महीने 2,000 से 5,000 रुपये तक वसूले जाते थे
  • भारी चालान (₹30,000+) को ‘सेटिंग’ के जरिए ₹100–₹200 में निपटाया जाता था
  • ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के रिश्वत लेते वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल किया जाता था

एक मामले में एक ट्रैफिक सब-इंस्पेक्टर से 1.5 लाख रुपये वसूले जाने की भी बात सामने आई है।


🟥 गिरोह के सरगना कौन?

इस पूरे सिंडिकेट को तीन मुख्य आरोपी चला रहे थे:

  • राजू मीना
  • जीशान अली
  • रिंकू राणा

ये लोग ट्रांसपोर्टरों और कमर्शियल ड्राइवरों को टारगेट करते थे और उन्हें नियमों से बचाने का झांसा देकर उगाही करते थे।


🟨 गिरफ्तार आरोपियों का विवरण

आरोपी का नाम भूमिका
ASI जितेंद्र दक्षिण दिल्ली में तैनात, गिरफ्तार
कांस्टेबल प्रवीण आदर्श नगर थाने में तैनात, गिरफ्तार
राजू मीना गिरोह का सरगना
जीशान अली गिरोह का सरगना
रिंकू राणा गिरोह का सरगना

🟦 बड़ा खुलासा: पुलिस-गिरोह गठजोड़

जांच से साफ हुआ है कि यह केवल एक उगाही रैकेट नहीं बल्कि पुलिस और अपराधियों के बीच गहरे गठजोड़ का मामला है।

करीब 10 साल तक इस सिंडिकेट का सक्रिय रहना सिस्टम में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।

🟩 जनता और सिस्टम पर असर

  • सरकारी राजस्व को भारी नुकसान
  • सड़क सुरक्षा नियमों की अनदेखी
  • प्रदूषण नियंत्रण मानकों से समझौता
  • ईमानदार ट्रांसपोर्टरों के साथ अन्याय

🟥 आगे क्या?

क्राइम ब्रांच अब अन्य ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच कर रही है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं।

अशोक विहार ट्रैफिक सर्किल द्वारा अवैध मछली गाड़ियों से चालान की जगह फोन कॉल पर सौदेबाजी.

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