Saturday, March 14, 2026
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गैंगस्टर विकास गुलिया उर्फ लगरपुरिया और उसके आपराधिक ‘गुरु’ धीरपाल उर्फ काना उर्फ ढीलू मकोका में दोषी करार.

असल न्यूज़: द्वारका कोर्ट ने गैंगस्टर विकास गुलिया उर्फ लगरपुरिया और उसके आपराधिक ‘गुरु’ धीरपाल उर्फ काना उर्फ ढीलू को महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट (MCOCA) के सेक्शन-3 के तहत दोषी करार दिया है। ऑर्गेनाइज्ड क्राइम सिंडिकेट ऑपरेट करने के तहत दोनों को मिलने वाली सजा पर शनिवार को बहस होगी। लगभग सभी पब्लिक गवाहों के अपने बयान से मुकरने के बावजूद कोर्ट ने कई अहम तथ्यों और साक्ष्यों पर गौर करते हुए दोनों के खिलाफ यह फैसला दिया। दोनों के पास सीधे तौर पर कोई चल-अचल संपत्ति नहीं पाई गई, इसलिए कोर्ट ने मकोका के सेक्शन-4 से दोनों को बरी कर दिया। दिल्ली में 2002 से मकोका का यह सिर्फ तीसरा केस है, जिसे पुलिस कोर्ट में साबित करने में सफल रही है।

द्वारका इलाके में 2014-2015 के दौरान एक्सटॉर्शन कॉल्स, लैंड ग्रैबिंग और फायरिंग की वारदात हुई। जांच के बाद पुलिस ने पाया कि इनके पीछे विकास लगपुरिया गिरोह है। हरियाणा के भोंडसी जेल में उम्रकैद काट रहा नजफगढ़ का गैंगस्टर धीरपाल फोन से गैंग को ऑपरेट कर रहा था। तिहाड़ जेल में बंद झज्जर के बहादुरगढ़ का विकास लगरपुरिया मास्टरमाइंड है। दोनों के खिलाफ नजफगढ़ थाने में 3 जुलाई 2015 को मकोका के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने 89 गवाह बनाए। लगरपुरिया के 15 तो काना के 10 मर्डर, कातिलाना हमला, एक्सटॉर्शन, जमीन कब्जाने और आर्म्स एक्ट के केसों को खंगाला।

जेल से गैंग मेंबरों के संपर्क में था धीरपाल

जांच में खुलासा हुआ कि धीरपाल ने भोंडसी जेल में तीन नंबर यूज किए थे, जिनके जरिए वो तिहाड़ में बंद लगरपुरिया के पिता सुरेंद्र, अपनी गर्लफ्रेंड सोनिया और गैंग के मेंबरों से संपर्क में था। पुलिस ने सबकी कॉल डिटेल रिकॉर्ड निकलवाई। हालांकि भोंडसी जेल से फोन बरामद नहीं हो सका था। पुलिस ने दोनों के करीबियों के बैंक खातों को भी खंगाला। जेल के मुलाकाती रजिस्टर से दोनों को मिलने वालों की लिस्ट भी निकाली। एक गवाह मुकर गया था, लेकिन सेटलमेंट के लिए धीरपाल से जेल में मिलने की बात साबित हो गई। सोनिया ने धीरपाल को जानने से इनकार किया, लेकिन रजिस्टर में उसका नाम मिला।

कोर्ट ने माना की डर की वजह से अधिकतर एक्सटॉर्शन के पीड़ित मुकर सकते हैं। दिल्ली-हरियाणा में दर्ज दोनों के खिलाफ 2013 से 2015 के बीच दर्ज मुकदमों में हिसार के मर्डर केस में धीरपाल को हत्या तो लगरपुरिया को आर्म्स एक्ट में सजा पाए जाने, दोनों के मुकदमेवारों का उनसे तिहाड़ और भोंडसी जेल में मिलने जाने, एक गैंग मेंबर की कार का कई वारदात में इस्तेमाल होने को आपराधिक सिंडिकेट साबित करने के लिए अहम माना। मकोका के सेक्शन-3 में दोषी करार दिया।

गर्लफ्रेंड आरोपी बनती तो होती सजा

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि दुर्भाग्य से सोनिया को इस मामले में आरोपी नहीं बनाया गया है। मकोका के सेक्शन-4 के तहत सजा देने के लिए ऐसी चल-अचल संपत्ति आरोपी के पास होनी चाहिए, जिसका वह ठीक से हिसाब नहीं दे सके। सोनिया के चार बैंक खातों में डेढ़ साल के भीतर 32 लाख रुपये जमा हुए थे। दिलचस्प ये है कि उसकी तरफ से 2014-2015 में दो लाख तो 2015-16 में ढाई लाख रुपये का इनकम टैक्स रिटर्न भरा गया था। वह लगातार धीरपाल से भोडसी जेल में मिलने जाती थी।

ऐसे बना लगरपुरिया-काना सिंडिकेट

गैंगस्टर विकास गुलिया का जन्म 16 जून 1990 को झज्जर जिले के लगरपुर गाव में हुआ। पिता दिल्ली में फॉरेस्ट डिपार्टमेट में थे। लगरपुरिया ने 2007 में डीयू के रामलाल आनंद कॉलेज में एडमिशन लिया। नजफगढ़ के एक अखाड़े में जाने लगा तो झज्जर का मूल निवासी धीरपाल काना से दोस्ती हो गई। काना ने पूसा इंस्टिट्यूट से सिविल इंजीनियरिंग का डिप्लोमा किया था। लगरपुरिया ने सेकेंड ईयर से कॉलेज छोड़ दिया। काना का गैंगस्टर मंजीत महाल के करीबी ढिचाऊ कला निवासी रवींद्र से पैसो पर विवाद हो गया। यही से काना-लगरपुरिया गैंग बना, जो जबरन वसूली, लूट और जमीन कब्जाने लगा। गुड़गाव स्थित खेड़कीदौला इलाके में 5 अगस्त 2021 को 30 करोड़ रुपये की चोरी हुई, जिसका मास्टर माइंड लगरपुरिया निकला।

 

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