खेती की जमीन पर धड़ल्ले से निर्माण, तोड़फोड़ में सिर्फ सामने की दीवार ढही—बाकी ढांचा जस का तस.
अजय शर्मा: अलीपुर इलाके में खेती की जमीनों पर हो रहे अवैध गोदाम निर्माण को लेकर प्रशासन एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ताजा मामले में आरोप है कि SDM अलीपुर की मौजूदगी में हुई कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई।
ॐ साई धर्मकांटा के पास खेती की जमीन पर बनाए जा रहे अवैध निर्माण पर तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई, लेकिन सिर्फ सामने की दीवार गिराकर बाकी ढांचा जस का तस छोड़ दिया गया। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि निर्माण को दोबारा खड़ा किया जा सकता है।
इस बीच, सूत्रों के हवाले से एक और बड़ा दावा सामने आया है। बताया जा रहा है कि इलाके में अवैध निर्माण के एवज में रेवेन्यू विभाग के कुछ कर्मचारियों को प्रति गज ₹500 तक दिए जाने की चर्चा है। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
आपको यह भी बता दें के इस इलाके में प्रत्येक वर्ष हजारों करोड़ रूपये का काला धन खेती की जमीनों पर गोदाम और कालोनियों की आड़ में खपाया जाता हैं, लेकिन विजिलें विभाग, ED, सीबीआई सहित अन्य जाँच एजेंसिया गंभीरता से इस मुद्दे को देखें तो बड़े-बड़े सरकारी अधिकारी जिनकी जिम्मेदारी अवैध निर्माण रोकने की है नपते नजर आएगें
इसी मामलो को ही देख ले SDM अलीपुर इस अवैध गोदाम को केवल खाना पूर्ति कर छोड़ दिया जिससे की आने वाले दिनों में यह गोदाम बनकर दोबारा तैयार हो जाएगा
बड़े सवाल:
. क्या अवैध निर्माण के बदले पैसे वसूले जा रहे हैं?
. कार्रवाई अधूरी क्यों छोड़ी गई?
. क्या इसमें अधिकारियों की मिलीभगत है?
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।
खामपुर में अवैध गोदाम पर अधूरी कार्रवाई कर DDA के अधिकारी हुए नौ दो ग्यारह.

