Saturday, May 30, 2026
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अलीपुर में बनेगा 50,000 पौधों का हाईटेक ग्रीन बैंक.

अजय शर्मा: राजधानी दिल्ली में बढ़ती गर्मी और लगातार घटते हरित क्षेत्र के बीच पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली के वन एवं वन्यजीव विभाग ने उत्तरी दिल्ली के अलीपुर में 28 एकड़ भूमि पर 50 हजार पौधों की क्षमता वाली अत्याधुनिक नर्सरी (ग्रीन बैंक) विकसित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

करीब 79.57 लाख रुपये की लागत से तैयार होने वाली यह परियोजना आने वाले वर्षों में दिल्ली के हरित क्षेत्र को बढ़ाने और गर्मी के प्रभाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। विभाग ने परियोजना को प्राथमिकता देते हुए युद्धस्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। वर्क ऑर्डर जारी किया जा चुका है और लक्ष्य रखा गया है कि आदेश जारी होने के 45 दिनों के भीतर पूरी नर्सरी तैयार कर ली जाए।

आधुनिक तकनीक से तैयार होगी नर्सरी

वन विभाग ऐसी अनुभवी एजेंसी की तलाश कर रहा है, जिसे साइट मिलने के दो दिनों के भीतर काम शुरू करना होगा। परियोजना के तहत पौधों की बेहतर देखभाल और तेज विकास के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।

नर्सरी में मिस्ट चैंबर तकनीक विकसित की जाएगी। करीब 200 वर्ग मीटर क्षेत्र में बनने वाले इस विशेष चैंबर में 85 से 90 प्रतिशत तक नमी बनाए रखी जाएगी, जिससे भीषण गर्मी में भी पौधों को सुरक्षित रखा जा सकेगा।

धूप से बचाव के लिए बनेगा शेड नेट हाउस

पौधों को तेज धूप और अत्यधिक तापमान से बचाने के लिए 1000 वर्ग मीटर क्षेत्र में यूवी स्टेबलाइज्ड शेड नेट हाउस बनाया जाएगा। इसके अलावा सिंचाई के लिए आधुनिक ड्रिप और स्प्रिंकलर प्रणाली स्थापित की जाएगी, जिससे पानी की बचत के साथ पौधों को पर्याप्त नमी और पोषण मिल सकेगा।

पानी के लिए बनेगा 20 हजार लीटर का टैंक

नर्सरी में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 20 हजार लीटर क्षमता का आरसीसी टैंक बनाया जाएगा। वहीं पौधों के लिए विशेष पॉली बैग्स और मिट्टी-खाद मिश्रण वाले बेड तैयार किए जाएंगे, जिससे पौधों की गुणवत्ता और जीवित रहने की क्षमता बढ़ सके।

हरित दिल्ली की दिशा में बड़ा कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि अलीपुर में विकसित होने वाला यह हाईटेक ग्रीन बैंक दिल्ली में वृक्षारोपण अभियानों को गति देगा और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ शहरी गर्मी (Urban Heat Island Effect) को कम करने में भी मददगार साबित होगा। यह परियोजना राजधानी को अधिक हरित और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

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