असल न्यूज़: मध्यप्रदेश में सरकारी भंडारण व्यवस्था को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। भारतीय खाद्य निगम (FCI) की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि राजगढ़ जिले के ब्यावरा क्षेत्र स्थित गोदामों में रखा 51,602 मीट्रिक टन गेहूं कीट लगने के कारण खराब हो गया। खराब हुए गेहूं की अनुमानित कीमत करीब 1,354 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, यह गेहूं सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और गरीबों को खाद्यान्न उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खरीदा गया था। लेकिन लंबे समय तक उचित रखरखाव और निगरानी के अभाव में बड़ी मात्रा में गेहूं घुन और अन्य कीटों की चपेट में आकर खराब हो गया।
FCI की रिपोर्ट में बताया गया है, कि ब्यावरा क्षेत्र के कई गोदामों में भंडारित गेहूं में कीट लगने की शिकायतें मिली थीं। निरीक्षण के दौरान बड़ी मात्रा में अनाज खराब पाया गया, जिसके बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया।
इस खुलासे के बाद खाद्य भंडारण व्यवस्था, और संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते निगरानी और रखरखाव किया जाता तो इतनी बड़ी मात्रा में खाद्यान्न को खराब होने से बचाया जा सकता था।
मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों द्वारा जांच शुरू कर दी गई है, जांच में यह पता लगाया जाएगा कि भंडारण में लापरवाही किस स्तर पर हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
गौरतलब है, कि देश में खाद्यान्न भंडारण और वितरण व्यवस्था को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में गरीबों के लिए खरीदा गया हजारों टन गेहूं खराब होने का मामला प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
फिलहाल जांच जारी है, और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

