असल न्यूज़: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो कथित तौर पर ट्रैफिक पुलिसकर्मियों और अन्य सरकारी कर्मचारियों को फंसाकर उनसे करोड़ों रुपये की उगाही करता था। मामले में पुलिस ने मकोका (MCOCA) के तहत 3,000 से अधिक पन्नों की विस्तृत चार्जशीट अदालत में दाखिल की है। जांच में गिरोह की 10 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों का भी खुलासा हुआ है।
ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को बनाते थे निशाना
क्राइम ब्रांच के अनुसार, गिरोह का सरगना राजकुमार उर्फ राजू मीणा वर्ष 2015 से इस तरह की गतिविधियों में शामिल था। जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य सड़क पर ड्यूटी कर रहे ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के पास पहुंचकर चालान से बचने के लिए मामूली रकम देने की पेशकश करते थे।
यदि कोई पुलिसकर्मी उनकी बातों में आ जाता, तो गिरोह के सदस्य छिपे हुए कैमरों या मोबाइल फोन से पूरी घटना रिकॉर्ड कर लेते थे। बाद में वीडियो को इस तरह प्रस्तुत किया जाता था, मानो संबंधित पुलिसकर्मी रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया हो।
वीडियो बनाकर करते थे ब्लैकमेल
पुलिस के मुताबिक, रिकॉर्ड किए गए वीडियो के आधार पर पुलिसकर्मियों और सरकारी कर्मचारियों को ब्लैकमेल किया जाता था। आरोप है कि उन्हें वीडियो वायरल करने, विभागीय शिकायत दर्ज कराने और निलंबन की कार्रवाई करवाने की धमकी देकर मोटी रकम वसूली जाती थी।
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह सिर्फ पुलिसकर्मियों तक सीमित नहीं था, बल्कि कई अन्य सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को भी इसी तरह निशाना बनाया गया। बदनामी और कार्रवाई के डर से कई लोग समझौते के नाम पर पैसे देने को मजबूर हो जाते थे।
अवैध ‘मार्का नेटवर्क’ से भी होती थी कमाई
क्राइम ब्रांच की जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण खुलासा हुआ। पुलिस के अनुसार, गिरोह कथित तौर पर एक अवैध “मार्का” या स्टिकर नेटवर्क भी संचालित करता था। आरोप है कि कमर्शियल वाहन चालकों से नियमित रूप से पैसे वसूले जाते थे और बदले में उन्हें कार्रवाई से बचाने का भरोसा दिया जाता था।
पुलिस का कहना है, कि इस नेटवर्क के जरिए भी गिरोह ने बड़ी मात्रा में अवैध कमाई की।
10 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों का खुलासा
आर्थिक जांच के दौरान पुलिस को गिरोह से जुड़ी करोड़ों रुपये की संपत्तियों का पता चला। जांच में सामने आया कि अपराध से अर्जित धन से मकान, दुकानें, प्लॉट, वाहन और बैंक खातों में निवेश किया गया था। इन संपत्तियों का बाजार मूल्य 10 करोड़ रुपये से अधिक बताया जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, कई संपत्तियां सीधे आरोपियों के नाम पर नहीं थीं, बल्कि परिवार के सदस्यों और करीबी सहयोगियों के नाम पर खरीदी गई थीं, ताकि धन के स्रोत को छिपाया जा सके।
राजू मीणा की पत्नी भी गिरफ्तार
मामले में पुलिस ने राजू मीणा की पत्नी सुरेखा रानी को भी गिरफ्तार किया है। सुरेखा रानी पेशे से वकील हैं और कड़कड़डूमा कोर्ट में प्रैक्टिस करती हैं।
क्राइम ब्रांच का आरोप है, कि अपराध से अर्जित कई संपत्तियां उनके नाम पर खरीदी गई थीं और वह गिरोह की अवैध कमाई की लाभार्थी थीं। फिलहाल उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
पांच आरोपी गिरफ्तार, जांच जारी
दिल्ली पुलिस ने अब तक इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में गिरोह का सरगना राजकुमार उर्फ राजू मीणा, मुकेश उर्फ पकौड़ी, संजय गुप्ता, जीशान अली और सुरेखा रानी शामिल हैं।
क्राइम ब्रांच का कहना है, कि मामले में गवाहों के बयान, डिजिटल साक्ष्य, बैंक रिकॉर्ड, संपत्ति दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण सबूत जुटाए गए हैं। इन्हीं के आधार पर अदालत में 3,000 से अधिक पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई है।
पुलिस का कहना है कि गिरोह से जुड़े अन्य लोगों, छिपाई गई संपत्तियों और अवैध धन के अन्य स्रोतों की जांच अभी जारी है।
बता दें कि आउटर और दिल्ली आउटर और बाहरी दिल्ली के कुछ पत्रकारों पर गिरफ्तारी की तलवार लटकी है
यह भी पढ़ें:-
अशोक विहार ट्रैफिक सर्किल द्वारा अवैध मछली गाड़ियों से चालान की जगह फोन कॉल पर सौदेबाजी.

