असल न्यूज़: देश की राजधानी दिल्ली में टीबी (ट्यूबरकुलोसिस) के मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। दिल्ली सरकार की ओर से चलाए गए विशेष स्क्रीनिंग अभियान में महज डेढ़ महीने के भीतर 12,078 टीबी मरीज सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अभियान अभी जारी है और आने वाले दिनों में यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।
डेढ़ महीने में सामने आए 12,078 केस
दिल्ली स्वास्थ्य विभाग ने 24 मार्च से 5 मई 2026 तक राजधानी के अलग-अलग इलाकों में टीबी स्क्रीनिंग ड्राइव चलाई। इस दौरान कुल 71,603 लोगों की जांच की गई, जिसमें 12,078 लोग टीबी पॉजिटिव पाए गए। यानी करीब 16.8 प्रतिशत पॉजिटिविटी रेट दर्ज किया गया।
राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के तहत मिले इतने बड़े आंकड़े ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञ इसे मेडिकल इमरजेंसी जैसे हालात मान रहे हैं।
एक्स्ट्रापल्मोनरी टीबी के सबसे ज्यादा मामले
मिले कुल मामलों में 5,073 केस एक्स्ट्रापल्मोनरी टीबी (EPTB) के हैं, जो कुल मामलों का करीब 42 प्रतिशत है। यह देश में सबसे अधिक अनुपातों में से एक माना जा रहा है।
यह टीबी फेफड़ों के अलावा शरीर के अन्य हिस्सों जैसे लिम्फ नोड्स, हड्डियों, जोड़ों और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है। इसकी पहचान करना काफी मुश्किल होता है क्योंकि इसके सामान्य लक्षण जल्दी सामने नहीं आते।
बच्चों में भी तेजी से फैल रही टीबी
रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों में टीबी के 1,323 मामले सामने आए हैं, जो कुल मामलों का लगभग 11 प्रतिशत हैं। वहीं 10,755 वयस्क मरीज दर्ज किए गए हैं।
लिंग के आधार पर आंकड़ों में:
- 6,360 पुरुष मरीज
- 5,715 महिला मरीज
- 3 ट्रांसजेंडर मरीज
शामिल हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने क्या कहा?
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने कहा कि राजधानी के 38 हाई-रिस्क वार्ड्स में विशेष अभियान चलाया गया है ताकि संक्रमित मरीजों की जल्द पहचान कर इलाज शुरू किया जा सके।
उन्होंने कहा कि मरीजों को परिवार की स्क्रीनिंग और सपोर्ट सिस्टम भी उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
दिल्ली बना देश का सबसे ज्यादा टीबी प्रभावित क्षेत्र
भारत टीबी प्रिवेलेंस सर्वे (2019-2021) के मुताबिक, दिल्ली देश में सबसे अधिक टीबी बोझ वाला क्षेत्र बन चुका है। यहां प्रति एक लाख आबादी पर 747 टीबी मरीज दर्ज किए गए हैं।
जांच में हो रही दिक्कत
विशेषज्ञों के अनुसार, एक्स्ट्रापल्मोनरी टीबी की पहचान करना चुनौतीपूर्ण होता है। कई मामलों में बायोप्सी और एडवांस इमेजिंग की जरूरत पड़ती है। देर से पहचान होने पर मरीज की हालत गंभीर हो सकती है।
पड़ोसी राज्यों से भी आ रहे मरीज
स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली में आधुनिक जांच सुविधाएं उपलब्ध होने के कारण पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में मरीज रेफर किए जा रहे हैं। यही वजह है कि राजधानी में टीबी के मामलों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।

