असल न्यूज़: कैंट बोर्ड के मनोनीत सदस्य और भाजपा नेता डॉ. सतीश चंद्र शर्मा को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने कथित तौर पर 3 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। वहीं, उनकी गिरफ्तारी के बाद क्षेत्र में कई लोगों ने खुशी जताते हुए लड्डू बांटे।
ठेकेदार से मांगे थे 10 लाख रुपये
जानकारी के अनुसार, गंगानगर निवासी ठेकेदार विक्की ने कैंट बोर्ड क्षेत्र के गांधी बाग पार्किंग, एंट्री, कैंटीन और तहबाजारी का ठेका लिया हुआ था। आरोप है कि डॉ. सतीश शर्मा ठेका निरस्त कराने की धमकी देकर उनसे 10 लाख रुपये की रिश्वत मांग रहे थे।
ठेकेदार ने मामले की शिकायत CBI से की, जिसके बाद एजेंसी ने जाल बिछाकर कार्रवाई की।
3 लाख रुपये लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार
CBI की टीम ने योजना के तहत शुक्रवार शाम ठेकेदार को 3 लाख रुपये लेकर डॉ. सतीश शर्मा के अंसल टाउन स्थित आवास पर भेजा। जैसे ही कथित रिश्वत की रकम सौंपी गई, टीम ने छापा मारकर उन्हें रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के दौरान उनके आवास से नकदी भी बरामद होने की जानकारी सामने आई है।
छावनी परिषद ने सदस्यता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की
गिरफ्तारी के बाद छावनी परिषद प्रशासन ने उनकी सदस्यता समाप्त करने के लिए रक्षा मंत्रालय को पत्र भेज दिया है। मामले में आगे की विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।
गिरफ्तारी पर लोगों ने बांटे लड्डू
डॉ. सतीश शर्मा की गिरफ्तारी के बाद सदर बाजार क्षेत्र में कुछ लोगों ने लड्डू बांटकर खुशी जताई। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कैंट क्षेत्र में मकान निर्माण और अन्य कार्यों के लिए उनसे कथित तौर पर मोटी रकम वसूली जाती थी।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि लंबे समय से लोग परेशान थे, लेकिन शिकायत करने का साहस नहीं जुटा पा रहे थे। CBI की कार्रवाई के बाद लोगों ने राहत महसूस की है।
‘हथौड़ा टीम’ का डर दिखाने का आरोप
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि जो लोग पैसे देने से इनकार करते थे, उन्हें कैंट बोर्ड की कथित ‘हथौड़ा टीम’ की कार्रवाई का डर दिखाया जाता था। लोगों का कहना है कि इसी कारण कई लोग खुलकर विरोध नहीं कर पाते थे।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
जनप्रतिनिधियों ने टिप्पणी से किया इनकार
मामले को लेकर लोकसभा सांसद अरुण गोविल, राज्यसभा सांसद लक्ष्मीकांत वाजपेयी और कैंट विधायक अमित अग्रवाल ने सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है।
वहीं, कुछ स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के बावजूद ऐसे मामलों से सरकार की छवि प्रभावित होती है।
फिलहाल, CBI मामले की जांच में जुटी हुई है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।

