असल न्यूज़: राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर बेंच ने चर्चित दुष्कर्म मामले में स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए आसाराम को राहत देने से इनकार कर दिया। हालांकि मामले में सहआरोपी शिल्पी और शरत चंद को अदालत ने बरी कर दिया है।
यह मामला वर्ष 2013 का है, जब जोधपुर स्थित आश्रम में एक 13 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म का आरोप सामने आया था। मामले की जांच और सुनवाई के बाद वर्ष 2018 में जोधपुर की विशेष अदालत ने आसाराम को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद इस फैसले को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
लंबी सुनवाई के बाद बुधवार, को हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए आसाराम की सजा को कायम रखा। अदालत के इस फैसले को मामले में बड़ा कानूनी मोड़ माना जा रहा है।
फिलहाल आसाराम, 7 जुलाई तक अंतरिम जमानत पर बाहर है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब उसे तय समय पर सरेंडर करना पड़ सकता है।
गौरतलब है, कि यह मामला देशभर में काफी चर्चित रहा था और फैसले पर सभी की नजरें टिकी हुई थीं। हाईकोर्ट के निर्णय के बाद अब कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।

