असल न्यूज़: राजधानी दिल्ली में मतदाता सूची को पूरी तरह त्रुटिरहित और अपडेट बनाने के लिए चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान तेज कर दिया है। अब 30 जून से बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे। चुनाव आयोग का लक्ष्य 7 अक्टूबर 2026 तक अंतिम और शुद्ध मतदाता सूची जारी करना है।
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के मुताबिक, अब तक राजधानी के 42.53 प्रतिशत मतदाताओं यानी करीब 62.44 लाख लोगों की डेटा मैपिंग पूरी की जा चुकी है। यह मैपिंग वर्ष 2002 की पुरानी मतदाता सूची के आधार पर की जा रही है, ताकि प्रवासन, विस्थापन और फर्जी नामों की सही पहचान हो सके।
30 जून से घर-घर जाएंगे BLO
चुनाव आयोग के अनुसार, 30 जून से 29 जुलाई तक बीएलओ राजधानी के हर इलाके में घर-घर जाकर फिजिकल वेरिफिकेशन करेंगे। इस दौरान वे गणना फॉर्म भरेंगे और डेटा मैपिंग से मिले रिकॉर्ड का मिलान करेंगे।
आयोग का कहना है कि इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य मृत, फर्जी या गलत तरीके से दर्ज मतदाताओं की पहचान कर मतदाता सूची को साफ और पारदर्शी बनाना है।
अगर किसी घर पर बीएलओ को ताला मिलता है, तो उन्हें कम से कम तीन बार वहां जाना होगा। साथ ही, संपर्क के लिए दरवाजे के नीचे सूचना पर्ची भी छोड़ी जाएगी।
मतदान केंद्रों में भी होगा बदलाव
मतदान के दौरान लंबी लाइनों की समस्या कम करने के लिए चुनाव आयोग ने पोलिंग स्टेशनों का युक्तिकरण भी शुरू कर दिया है। अब एक बूथ पर अधिकतम 1200 मतदाता ही रखे जाएंगे, जबकि पहले यह संख्या 1500 तक होती थी।
इसके अलावा पहली बार चुनाव आयोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, एक्स और इंस्टाग्राम के जरिए वीडियो ट्यूटोरियल जारी कर रहा है, ताकि लोग आसानी से अपना नाम खोज सकें और जरूरी फॉर्म भर सकें।
दिल्ली में कुल कितने मतदाता?
- कुल मतदाता: 1,46,82,523
- अब तक मैपिंग पूरी: 62,44,045
- मैपिंग प्रतिशत: 42.53%
- अंतिम मतदाता सूची जारी होने की संभावित तारीख: 7 अक्टूबर 2026
सुप्रीम कोर्ट ने भी लगाई मुहर
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि एसआईआर कराना चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है और यह प्रक्रिया संविधान के अनुरूप है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा, कि निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव के लिए मतदाता सूची का शुद्ध होना बेहद जरूरी है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग नहीं किया है।
चुनाव आयोग ने बताया क्यों जरूरी है SIR
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाए रखने और फर्जी या अयोग्य मतदाताओं के नाम हटाने के लिए यह अभियान जरूरी है।
गौरतलब है कि एसआईआर अभियान की शुरुआत पहले बिहार में की गई थी, जिसके बाद इसे पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु समेत कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक बढ़ाया गया।

