असल न्यूज़: उत्तर प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं को जून महीने से महंगी बिजली का झटका लगने वाला है। दूध, पेट्रोल-डीजल और सीएनजी की बढ़ती कीमतों के बीच अब बिजली बिल भी बढ़ने जा रहा है। यूपी पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने बिजली बिल पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त फ्यूल सरचार्ज लगाने का फैसला किया है, जो जून 2026 के बिल से लागू होगा।
10% फ्यूल सरचार्ज का अतिरिक्त बोझ
UPPCL द्वारा जारी आदेश के अनुसार बिजली उत्पादन और खरीद की बढ़ती लागत को देखते हुए फ्यूल सरचार्ज में वृद्धि की गई है। इसके तहत उपभोक्ताओं को अपने नियमित बिजली बिल के अलावा 10 प्रतिशत अतिरिक्त राशि का भुगतान करना होगा। यह शुल्क घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक समेत सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं पर लागू होगा।
गर्मी में बढ़ी परेशानी
बिजली दरों में यह बढ़ोतरी ऐसे समय पर की गई है जब प्रदेश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी के बीच बिजली कटौती और अनियमित आपूर्ति की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। कई इलाकों में लोग लंबे समय तक बिजली गुल रहने और लो-वोल्टेज की समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे में बिजली बिल में 10 प्रतिशत की अतिरिक्त वृद्धि आम लोगों की जेब पर सीधा असर डालेगी।
बढ़ती उत्पादन लागत बनी वजह
बिजली विभाग का कहना है कि कोयला, गैस और अन्य ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के कारण बिजली उत्पादन की लागत बढ़ी है। इसी लागत की भरपाई के लिए फ्यूल सरचार्ज लगाया गया है।
स्थायी नहीं है अतिरिक्त शुल्क
UPPCL ने स्पष्ट किया है कि यह फ्यूल सरचार्ज स्थायी नहीं है। यदि भविष्य में ईंधन की कीमतों में कमी आती है तो इस अतिरिक्त शुल्क को समायोजित किया जा सकता है। फिलहाल जून 2026 से आने वाले बिजली बिलों में उपभोक्ताओं को 10 प्रतिशत अधिक भुगतान करना होगा।
विपक्ष ने उठाए सवाल
समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश में लगाए गए स्मार्ट मीटरों की वजह से पहले ही उपभोक्ताओं के बिल काफी बढ़ चुके हैं।
उन्होंने कहा, “जो स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, उनसे 10 फीसदी नहीं बल्कि 100 फीसदी तक बिल बढ़ गया है। सबसे पहले इन स्मार्ट मीटरों को हटाया जाए, अन्यथा ये मीटर आम जनता को तबाह और बर्बाद कर देंगे।”
बिजली दरों में बढ़ोतरी, और अतिरिक्त फ्यूल सरचार्ज को लेकर प्रदेशभर में उपभोक्ताओं की नाराजगी भी देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि बिजली व्यवस्था में सुधार किए बिना लगातार बढ़ते शुल्क आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहे हैं।

